
कश्मीर को अपना बताया, हिन्दुओं के खिलाफ भड़काया... पहलगाम अटैक से PAK आर्मी चीफ मुनीर का कनेक्शन?
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असीम मुनीर की भारत विरोधी बयानबाजी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में विदेश में रह रहे पाकिस्तानियों की एक बैठक के दौरान सामने आई थी. भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते हुए मुनीर ने जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के दावे को दोहराया और टू-नेशन थ्योरी का बचाव किया जिसके कारण 1947 में भारत का बंटवारा हुआ था.
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से पूरा देश सन्न है और हर कोई आतंकियों को करारा जवाब देने की मांग कर रहा है. आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी घूमने आए पर्यटकों को उनका नाम और मजहब पूछकर निशाना बनाया है. यही नहीं, आतंकी एके-45 के साथ बॉडीकैम से लैस थे, ताकि दहशत के इस मंजर को रिकॉर्ड किया जा सके. हमले में अब तक 28 लोग मारे जा चुके हैं और पूरे इलाके में दहशतगर्दों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
हिन्दुओं को बताया था अलग
यह हमला पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के उस बयान के कुछ दिन बात हुआ, जिसमें उन्होंने कश्मीर को इस्लामाबाद के 'गले की नस' बताया था. हमले के बाद ये सवाल लगातार उठ रहे हैं कि असीम मुनीर के बयान ने आतंकियों को हिन्दुओं के खिलाफ भड़काने का काम किया. क्योंकि मुनीर ने बंटवारे का जिक्र करते हुए हिन्दुओं को मुस्लिमों से अलग बताया था और कहा कि हम साथ नहीं रह सकते. ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तानी जनरल के इसी बयान ने आतंकी गुटों को हिंसा फैलाने के लिए प्रेरित किया, खासकर तब जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत की चार दिवसीय यात्रा पर हैं.
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असीम मुनीर की भारत विरोधी बयानबाजी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में विदेश में रह रहे पाकिस्तानियों की एक बैठक के दौरान सामने आई थी. भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते हुए मुनीर ने जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के दावे को दोहराया और टू-नेशन थ्योरी का बचाव किया जिसके कारण 1947 में भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना था.
'कश्मीर हमारी गर्दन की नस'

ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की मौत से ईरान बुरी तरह आहत है. इस हमले में लारिजानी का बेटा भी मारा गया है. ईरान ने अब अमेरिकी और इजरायली हमले के जवाब में कार्रवाई तेज करते हुए कई क्लस्टर बम गिराए है और तेल अवीव में भारी नुकसान पहुंचाया है और अनुमान लगाया जा रहा है कि जंग यहां से अब और भीषण रूप ले लेगी.

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ईरान और अमेरिका की जंग का आज 19वीं दिन है. इस बीच इजरायल के हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ लीडर अली लारिजानी की मौत के बाद अब ईरान ने इजरायल और अमेरिकी बेसों पर हमले तेज कर दिए हैं. ईरान ने मिसाइल हमलों का वीडियो भी जारी किया है. IRGC ने कहा कि हमले में मल्टी-वॉरहेड बैलिस्टिक मिसाइलों समेत कई और घातक मिसाइलें शामिल हैं.

अमेरिका ने होर्मुज के समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से हमला किया है. अमेरिकी राष्पति ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि उनके साथी देश (नाटो) इस लड़ाई में साथ नहीं दे रहे हैं. इस हमले का मकसद तेल की सप्लाई को बहाल करना और ईरानी मिसाइलों के खतरे को खत्म करना है.

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां आक्रामक रुख अपनाया है, वहीं कई सहयोगी देश सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाकर कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं. ब्रिटेन के ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिसे लेकर ट्रंप भड़क गए हैं.

इज़रायल ने दावा किया है कि ईरान की नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी का भी खात्मा कर दिया है. अली लारीजानी को ईरान का De Facto Leader भी कहा जाता था, जो असल में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद पूरे देश की सत्ता संभाल रहे थे. शुक्रवार को उन्हें आखिरी बार तेहरान के उस जुलूस में देखा गया था, जो फिलिस्तीन की आज़ादी के लिए निकाला जा रहा था. उस जुलूस में अली लारीजानी ने तेहरान की सड़कों पर उतरकर अमेरिका और इज़रायल को खुली चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि ईरान के नेता छिपकर डरने वालों में से नहीं है और उसी दिन उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के लिए भी ये कहा था कि इस युद्ध में वो खुद को बचाकर रखें. उस वक्त ऐसा माना गया कि अली लारीजानी खुल्लम-खुल्ला राष्ट्रपति ट्रंप को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और दावा है कि इसी के बाद इज़रायल'और अमेरिका दोनों ने मिलकर उनका डेथ वॉरंट लिख दिया.







