
कनाडा में भारतीय डिप्लोमेट को लेकर चिपकाए गए 'Wanted' पोस्टर, भारत ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
AajTak
मंगलवार को एक बार फिर कनाडा के वैंकूवर में भारतीय दूतावास की बिल्डिंग पर भारत के राजनयिकों और काउंसुल जनरल की तस्वीरों के साथ पोस्टर चिपकाए गए हैं. इस पोस्टर पर 'वांटेड' शब्द का इस्तेमाल किया गया है. भारत विरोधी यह नया पोस्टर ऐसे समय में सामने आया है जब सितंबर में एसएफजे एक बार फिर से जनमत संग्रह आयजित कर सकता है.
कनाडा में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से भारतीय अधिकारियों को धमकाने की कोशिश लगातार जारी है. मंगलवार को एक बार फिर कनाडा के वैंकूवर में भारतीय दूतावास की बिल्डिंग पर भारत के राजनयिकों और काउंसुल जनरल की तस्वीरों के साथ पोस्टर चिपकाए गए हैं. इस पोस्टर पर 'वांटेड' शब्द का इस्तेमाल किया गया है.
इस पोस्टर में कनाडा में मारे गए SFJ प्रमुख हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का भी जिक्र है.भारत विरोधी खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) निज्जर की हत्या के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराता है.
वियना कन्वेंशन ऑन कांसुलर रिलेशंस संधि के तहत किसी भी देश के दूतावास की सुरक्षा की जिम्मेदारी उस (होस्ट) देश की होती है. ऐसे में मंगलवार सुबह भारतीय अधिकारियों को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने कनाडा के अधिकारियों से उस चूक की शिकायत की है, जिस चूक के कारण वैंकवूर में भारत के वाणिज्य दूतावास की इमारत पर भारत विरोधी पोस्टर लगा दिया गया. यह पोस्टर भी उसी पोस्टर के समान है जो इस सप्ताह की शुरुआत में वैंकूवर मेट्रो रीजन में चिपकाए गए थे.
कनाडाई पुलिस की चूक का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि चरमपंथी समूहों ने पहले से ही 15 अगस्त को भारतीय दूतावास को घेरने की चेतावनी दी थी. इसके अलावा इससे पहले भी वैंकवूर में क्षेत्र में इस तरह के पोस्टर चिपकाए गए थे.
जानकारी के बाद भारत विरोधी पोस्टर को हटाया गया
मंगलवार सुबह को जब यह पता चला तो दूतावास के प्रवेश द्वार के पास लगे भारत विरोधी पोस्टर को हटा दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस पोस्टर को तड़के सुबह चिपकाया गया था.

अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








