
कनाडा, ट्रूडो, निज्जर... जयशंकर और US विदेश मंत्री की मुलाकात में क्या हुई बात?
AajTak
ट्रूडो ने निज्जर को कनाडाई नागरिक बताया था, जबकि भारत ने उसे आतंकी घोषित किया है. निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा में तनाव चल रहा है. इसी बीच कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को कहा था कि उन्हें यकीन है कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन अपने भारतीय समकक्ष के साथ निज्जर की हत्या का मुद्दा उठाएंगे. हालांकि, अमेरिका ने ट्रूडो की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय अमेरिका के पांच दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात की. ऐसी अटकलें थी कि दोनों के बीच कनाडा या निज्जर पर कोई चर्चा नहीं हुई. लेकिन अब कहा जा रहा है कि ब्लिंकन ने इस वार्ता के दौरान जयशंकर के समक्ष कनाडा का मुद्दा उठाया था.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने भारत से खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में कनाडा की जांच में सहयोग करने को कहा है. अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया कि ब्लिंकन ने जयशंकर के साथ अपनी मुलाकात में कनाडा का मुद्दा उठाया है और भारत सरकार से कनाडा की जांच में सहयोग करने को कहा है.
वहीं, जयशंकर ने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए राजनीति के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को नसीहत दी थी. उन्होंने कनाडा का नाम लिए बगैर कहा था कि विदेशी ताकतों के दखल की वजह से लोकतंत्र खतरे में है.
क्या है मामला?
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 19 सितंबर को कनाडा की संसद में निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि बीते कुछ हफ्तों से कनाडा की सुरक्षा एजेंसियां कनाडा के नागरिक हरदीप सिंह निज्जर और भारत सरकार के संभावित कनेक्शन के विश्वसनीय आरोपों की सक्रिय तौर पर जांच कर रही हैं. कनाडा कानून का पालन करने वाला देश है. हमारे नागरिकों की सुरक्षा और हमारी संप्रभुता की रक्षा करना हमारा मौलिक कर्तव्य है. हालांकि, कनाडाई सरकार की ओर से ऐसे कोई भी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए गए हैं कि निज्जर की हत्या में भारत का हाथ है.
इसके बाद कुछ दिनों पहले एक बार फिर ट्रूडो ने भारत पर लगाए आरोपों को दोहराया था. उन्होंने न्यूयॉर्क में कहा था कि मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि इन आरोपों को हाउस ऑफ कॉमन्स के पटल पर लाने का निर्णय हल्के में नहीं लिया गया था. इसे बहुत ही गंभीरता से लिया गया था. निज्जर की हत्या के पीछे भारत सरकार का हाथ है. मुझे लगता है कि एक निष्पक्ष न्यायिक प्रणाली वाले देश के तौर पर यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम बेहद ईमानदारी के साथ काम करें.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.








