
ऑपरेशन सिंदूर पर PAK पीएम शहबाज ने UN में जमकर बोला झूठ, ट्रंप को बताया 'शांति दूत'
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पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के साथ समग्र और नतीजापरक संवाद की बात कही. इसके साथ ही शहबाज ने ऑपरेशन सिंदूर पर जमकर झूठ बोला. इतना ही नहीं, शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सराहना की और उन्हें शांति दूत बताया.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान, भारत के साथ सभी लंबित मुद्दों पर कंपोजिट, व्यापक और नतीजापरक संवाद करने को तैयार है. इस दौरान उन्होंने कश्मीर मुद्दे को भी उठाया और भारत की नीतियों की आलोचना की.
संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का भी ज़िक्र किया और दावा किया कि मई में 4 दिन तक चले संघर्ष के दौरान 7 भारतीय विमान क्षतिग्रस्त हो गए थे. हालांकि पिछले महीने एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने कहा था कि भारतीय विमानों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान 5 पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और एक बड़े विमान को मार गिराया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान बातचीत और कूटनीति के ज़रिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास करता है. उन्होंने कहा कि यह उनकी तरफ से विश्व समुदाय के सामने सबसे ईमानदार और गंभीर प्रस्ताव है. पाकिस्तान सभी लंबित मुद्दों पर भारत के साथ समग्र, व्यापक और नतीजा देने वाली बातचीत के लिए तैयार है.
अपने संबोधन में शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने दक्षिण एशिया में युद्ध को टालने में मदद की. उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में शांति बढ़ाने में राष्ट्रपति ट्रंप के योगदान के सम्मान में पाकिस्तान ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया है. उन्होंने कहा कि हम कम से कम इतना तो कर ही सकते थे, मुझे लगता है कि वह सचमुच शांति के प्रतीक हैं.
शहबाज ने ट्रंप को बताया शांति पुरुष
इससे पहले शहबाज शरीफ ने गुरुवार को वॉशिंगटन डीसी का दौरा किया, जहां उन्होंने फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की. इस दौरान शहबाज शरीफ ने ट्रंप को 'शांति पुरुष' बताया. साथ ही पाकिस्तान और भारत के बीच युद्धविराम कराने में उनके साहसी और निर्णायक नेतृत्व की सराहना की. हालांकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि भारत ने न तो कभी किसी की मध्यस्थता स्वीकार की थी, न स्वीकार करता है, और न ही कभी करेगा.

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