
उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल में निर्माण कार्य फिर से शुरू, 12 नवंबर से बंद था काम
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सिलक्यारा से पोल गांव की सुरंग में हेड साइड सिलक्यारा में 12 नवंबर को भूस्खलन होने के बाद 41 श्रमिक अंदर फंस गए थे. उन्हें 17 दिन तक चले बचाव अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया था. भूस्खलन की इस घटना के साथ ही 12 नवंबर की सुबह से ही सुरंग निर्माण का काम भी ठप पड़ गया था.
बीते साल नवंबर में हादसे का शिकार हुई सिलक्यारा सुरंग में टेल साइड पोल गांव की ओर से निर्माण के कार्य शुरू हो गए हैं. नेशनल हाइवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की कार्यदाई संस्था के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर एमके शर्मा ने उक्त जानकारी दी. उन्होंने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए हुए आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि मिनिस्ट्री और NHIDCL से अनुमति मिलने के बाद धीरे-धीरे काम शुरू किया गया. आने वाले दिनो में काम अपनी गति पकड़ लेगा.
सिलक्यारा से पोल गांव की सुरंग में हेड साइड सिलक्यारा में 12 नवंबर को भूस्खलन होने के बाद 41 श्रमिक अंदर फंस गए थे. उन्हें 17 दिन तक चले बचाव अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया था. भूस्खलन की इस घटना के साथ ही 12 नवंबर की सुबह से ही सुरंग निर्माण का काम भी ठप पड़ गया था. 4.531 किमी लंबी इस सुरंग में अभी 480 मीटर की खोदाई होनी शेष है. अभी तक अफवाहों में ये बात आम थी कि सुरंग का काम शुरू हो भी पाएगा या नहीं, लेकिन कार्य शुरू होने से अब जल्द सुरंग के पूरी होने की उम्मीद जगी हैं.
अनुमति के बाद सिलक्यारा में सुरंग का निर्माण फिर शुरू होने से श्रमिकों-कामगारों में खुशी का माहौल है. इस उम्मीद में कामगारों के चेहरे की चमक भी लौट आई है. सुरंग के निर्माण कार्य शुरू होने से उनका रोजगार जल्द पटरी पर लौटेगा. पोल गांव बड़कोट साइड को सुरंग का टेल साइड कहते हैं और यहीं से कार्य प्रारंभ किया गया है. इसमें सबसे पहले फेसिंग हेडिंग का कार्य शुरू किया गया है जो कि धीरे-धीरे गति पकड़ेगा. वहीं लेबर्स और अन्य कर्मचारियों का कहना है कि उनके मन में बिलकुल भी डर का माहोल नहीं है, वह खुशी-खुशी इस काम को करने को तैयार हैं. पिछली जो घटना हुई थी वो महज एक हादसा था. इस बार और अधिक और अच्छी सुरक्षा के साथ कार्य किया जा रहा है.

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