
अरुणाचल में शहीद हुए थे पति... जॉइन की आर्मी, मिलिए उस महिला अफसर से जो बनी ऑपरेशन सिंदूर की 'बैकबोन'
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ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने 6 और 7 मई की दरमियानी रात पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में 9 स्थानों पर जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकवादी शिविरों पर सटीक हवाई हमले किए, जिसमें 100 से अधिक आतंकी मारे गए. इन आतंकी शिविरों से भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाई जा रही थी और उन्हें निर्देशित किया जा रहा था.
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान गोलीबारी और मिसाइलों की लॉन्चिंग के बीच, भारतीय सेना की महिला अधिकारियों ने पाकिस्तानी हमले का मुकाबला करने में पुरुष सैन्य अधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी. आज तक से विशेष बातचीत में सिग्नल रेजिमेंट की एक महिला अधिकारी ने संघर्ष के अपने अनुभवों को याद किया, जिसके दौरान उन्होंने और उनकी टीम ने न केवल जमीन पर, बल्कि हवा में भी कम्युनिकेशन सिस्टम का काम संभाला था.
महिला अधिकारी ने कहा, 'किसी भी युद्धक्षेत्र में कम्युनिकेशन बहुत महत्वपूर्ण होता है. मुझे इस ऑपरेशन का हिस्सा बनने पर गर्व है. ऑपरेशन के दौरान हम जमीन पर तैनात रहे और अपने सभी कार्यों को पूरी जिम्मेदारी के साथ पूरा किया. हमने कम्युनिकेशन के सभी पहलुओं का ध्यान रखा, चाहे वह जमीन पर हो, हवा में हो या कॉन्फ्लिक्ट की वीडियोग्राफी हो.' उन्होंने आगे कहा कि फ्रंटलाइन पर पुरूष और महिला सैनिकों को समान व्यवहार मिलता है. महिला अधिकारियों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं हैं.
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ऑपरेशन राइनो के दौरान शहीद हुए थे पति
उन्होंने कहा, 'हम महिला होने के कारण कोई विशेष व्यवहार नहीं चाहते हैं, क्योंकि हम अन्य सैनिकों की तरह ही अपने देश की रक्षा कर रहे हैं.' उन्होंने यह भी बताया कि उनके पति सेना में सिग्नल ऑफिसर थे और अरुणाचल प्रदेश में ऑपरेशन राइनो के दौरान शहीद हो गए. महिला अधिकारी ने यह भी बताया कि उन्हें भारतीय सेना में शामिल होने की प्रेरणा किस बात से मिली. उन्होंने कहा, 'मेरे पति भारतीय सेना के सिग्नल कोर का हिस्सा थे. मैं हमेशा सोचती थी कि अगर मैं सेना में शामिल हो जाऊंगी तो वह हमेशा मेरे करीब रहेंगे. मैं अपने बेटे को भी यह दिखाना चाहती थी कि उसके पिता क्या थे.'
बेटा भी चाहता भारतीय सेना में शामिल होना

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