
PAK आर्मी चीफ का दो महीने में दूसरा अमेरिका दौरा, टॉप जनरल्स से की मुलाकात
AajTak
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने टैम्पा में यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर जनरल माइकल ई. कुरिला के रिटायरमेंट सेरेमनी और नए कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के पदभार ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया.
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर अपनी दूसरी आधिकारिक अमेरिका यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने शीर्ष अमेरिकी राजनीतिज्ञों और सैन्य अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय मुलाकातें कीं. पाकिस्तानी सेना के एक बयान के अनुसार, फील्ड मार्शल मुनीर ने टैम्पा में यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर जनरल माइकल ई. कुरिला के रिटायरमेंट सेरेमनी और नए कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के पदभार ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया.
फील्ड मार्शल मुनीर ने जनरल कुरिला की उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता और द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की. उन्होंने एडमिरल कूपर को बधाई देते हुए साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर सहयोग की उम्मीद जताई. असीम मुनीर ने जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन से भी मुलाकात की, जहां आपसी पेशेवर हितों के मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने जनरल केन को पाकिस्तान आने का निमंत्रण भी दिया.
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान ने की ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को सपोर्ट की घोषणा! अब अमेरिका को क्या जवाब देंगे आसिम मुनीर!
इसके अलावा, उन्होंने मित्र देशों के रक्षा प्रमुखों के साथ भी बातचीत की. पाकिस्तानी डायस्पोरा (अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के लोग) के साथ एक संवाद सत्र में, मुनीर ने उन्हें पाकिस्तान के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा रखने और निवेश आकर्षित करने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया. डायस्पोरा ने पाकिस्तान की प्रगति और विकास में समर्थन का वादा किया. यह यात्रा फील्ड मार्शल असीम मुनीर की जून में हुई 5 दिवसीय अमेरिका यात्रा के बाद हो रही है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ एक प्राइवेट डिनर में हिस्सा लिया था.
उस मुलाकात के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने तेल सौदे सहित विभिन्न क्षेत्रों में अमेरिका-पाकिस्तान सहयोग को बढ़ाने की घोषणा की थी. इससे पहले, अमेरिकी जनरल माइकल ई. कुरिला ने पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी प्रयासों में शानदार साझेदार बताया था और क्षेत्र में शांति व स्थिरता को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की भूमिका की प्रशंसा की थी. असीम मुनीर की इस यात्रा के दौरान उनके अमेरिका में ठहरने या पाकिस्तान वापसी की तारीख के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गई.

अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हाल में एक संघीय अधिकारी की गोली से नर्स एलेक्स जेफ्री प्रेटी की मौत हो गई थी. जिसके बाद से अमेरिका में पुलिस और फेडरल एजेंसियों की कार्रवाई, विरोध-प्रदर्शनों में जाने वालों और आम नागरिकों की जान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इस बीच वॉशिंगटन में प्रेटी की याद में लोगों ने कैंडल मार्च निकाला. देखें अमेरिका से जुड़ी 10 बड़ी खबरें.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.








