
16 सालों बाद नेपाल में तेज हुई राजशाही की मांग, कहां हैं आखिरी राजा, किस हाल में?
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नेपाल की जनता ने खुद सड़क पर उतरकर राजशाही को खत्म कर दिया. इसके बाद से वहां चुनी हुई सरकारें आने लगीं. तब इन डेढ़ दशकों में ऐसा क्या हुआ कि एक बार फिर राजशाही की मांग उठने लगी है. कहां हैं नेपाल के आखिरी राजा ज्ञानेंद्र और किस हाल में हैं?
पड़ोसी देश नेपाल से कुछ समय से कई खबरें आ रही हैं. सब की सब इस बात से जुड़ी हुई कि नेपाल को वापस हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया जाए. बता दें कि लंबे समय तक ये दुनिया का अकेला हिंदू देश रहा, लेकिन लोकतंत्र के आने के साथ ही इसने खुद को सेकुलर बना दिया. अब वहां लगातार आंदोलन हो रहे हैं कि लोकतंत्र हटाकर वापस शाही परिवार को ही कमान सौंपी जाए.
क्या मांग हो रही है
कुछ रोज पहले काठमांडू की सड़कों पर उतरे राजशाही समर्थकों ने राजा वापस आओ, देश बचाओ, जैसे नारे लगाए. वे आरोप लगा रहे हैं कि देश में सारी राजनैतिक पार्टियां करप्ट हैं. साथ ही वे दूसरे धर्मों को बढ़ावा दे रही हैं. ऐसे में नेपाल की पहचान खत्म हो जाएगी. आम जनता की नजरों में इसका इलाज ये है कि राजपरिवार दोबारा शासन करे. वो नियम तय करेगा और सबको मानना होगा.
क्यों परेशान हैं देशवासी सबसे बड़ी परेशानी हैं, वहां के इकनॉमिक और सोशल हालात. राजनैतिक दलों के करप्शन और ढीले रवैए की बात अक्सर कही जाती है. नेपाल के युवा काम-धाम के लिए लगातार दूसरे देशों की तरफ पलायन कर रहे हैं. लेकिन नेपाल की फॉरेन पॉलिसी से भी लोग डर चुके.
असल में राजशाही जाने के बाद पॉलिटिकल पार्टियां चीन के काफी करीब हो गईं. इनवेस्टमेंट के नाम पर चीन पर आरोप है कि वो नेपाल में घुसपैठ कर चुका. वहां की सड़कों से लेकर एयरपोर्ट तक पर चीन का काम जारी है. यहां तक कि नेपाल में चीनी भाषा सिखाई जा रही है. ऐसे में नेपाली जनता को डर है कि कई दूसरे देशों की तरह उसे भी ड्रैगन कर्ज में न डुबा दे.

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