
हमास से कनेक्शन, NATO हथियारों का अवैध अड्डा... जानें कैसे पाकिस्तान में फिदायीन फैक्ट्री बने जैश के ठिकाने
AajTak
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित बहावलपुर केंद्र, जेईएम के डि-फैक्टो चीफ अब्दुल रऊफ असगर द्वारा संचालित किया जाता था और करीब 15 एकड़ में फैला हुआ था. यहां जैश के संस्थापक मसूद अजहर और उसके परिजनों के घर भी स्थित हैं.
भारतीय सेनाओं द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत किए गए जवाबी हमले में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के पाकिस्तान स्थित दो मुख्य अड्डे बहावलपुर मुख्यालय और नारोवाल केंद्र को निशाना बनाया गया. ये दोनों मरकज न केवल आत्मघाती हमलावरों की ट्रेनिंग का अड्डा थे, बल्कि इनका संबंध फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास से भी जुड़ा था और यहां अफगानिस्तान से तस्करी कर लाए गए नाटो हथियारों का भंडारण भी किया जाता था. यह जानकारी भारतीय सुरक्षा अधिकारियों ने गुरुवार को दी.
बहावलपुर केंद्र: मसूद अजहर का किला
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित बहावलपुर केंद्र, जेईएम के डि-फैक्टो चीफ अब्दुल रऊफ असगर द्वारा संचालित किया जाता था और करीब 15 एकड़ में फैला हुआ था. यहां जैश के संस्थापक मसूद अजहर और उसके परिजनों के घर भी स्थित हैं.
भारतीय वायुसेना की मिसाइल स्ट्राइक के बाद मसूद अजहर ने खुद माना कि हमले में उसके 10 पारिवारिक सदस्य और 4 करीबी सहयोगी मारे गए. इनमें उसकी बड़ी बहन, बहनोई, भतीजा-भाभी, भांजी और पाँच बच्चे शामिल थे.
यह केंद्र नाटो द्वारा अफगानिस्तान में छोड़े गए हथियारों का प्रमुख ठिकाना बन चुका था. असगर इन हथियारों की तस्करी खैबर पख्तूनख्वा में मौजूद अपराधी नेटवर्क के जरिए करता था. बरामद हथियारों में M4 राइफलें, स्नाइपर गन, आर्मर पियर्सिंग गोलियां, नाइट विजन डिवाइसेज़ (NVD) शामिल थीं.
नारोवाल केंद्र: हमास से मिली तकनीक की प्रयोगशाला

ईरान जंग के बीच इजरायल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' का पूरी दुनिया में चर्चा है. ये एजेंसी दुश्मन के देश में घुसकर उसकी सोच, ताकत और भविष्य को खत्म कर देती है. ईरान युद्ध में पहली मिसाइल फायर होने से काफी पहले सी 'मोसाद' ने इसकी तैयारी रच ली थी. आखिर 'मोसाद' कितना अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय है? देखें ये शो.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा. कई टॉप कमांडर्स के मारे जाने के बाद भी ईरान, अमेरिका और इजरायल पर जबरदस्त पलटवार कर रहा है. ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. ना तो ईरान के तेवर कमजोर पड़ रहे और ना ही NATO और दुनिया के तमाम देश ट्रंप का साथ दे रहे. सवाल है क्या ईरान को हराना ट्रंप के लिए 'नाक की लड़ाई' बन गई है? देखें हल्ला बोल.

ईरान ने भी अपनी मिसाइल ताकत को दुनिया के सामने पेश किया है और ईरान ने हिंद महासागर में मौजूद ब्रिटेन के सैन्य बेस पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर दो लॉन्ग रेंज मिसाइलों से हमला किया है. हम आपको बता दें कि ईरान से दिएगो गार्सिया की दूरी करीब 4 हजार किलोमीटर है. ईरान ने दिएगो गार्सिया की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जिसमे एक को बीच में ही नष्ट करने का दावा किया जा रहा है.










