
सुन्नियों की सुनवाई नहीं, बहाइयों को कब्र तक नसीब नहीं, और भारतीय मुसलमानों का रहनुमा बनने चला है ईरान!
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भारत में मुसलमानों की स्थिति पर सवाल उठाने वाले ईरान में अल्पसंख्यक बेहद ही खराब स्थिति में रह रहे हैं. शिया बहुल ईरान में सुन्नी मुसलमानों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव होता है. अल्पसंख्यक बहाई समुदाय के लोगों को भी पुलिस मनमाने ढंग से हिरासत में रखती है. साथ ही धर्मांतरण कर ईसाई बने लोगों को मौत की सजा तक दी जाती है.
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने भारत में मुसलमानों की स्थिति को लेकर जो बयान दिया है, उस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने कहा है कि ईरानी लीडर का बयान अस्वीकार्य है. दरअसल, सोमवार को खामेनेई ने आरोप लगाया कि भारत के साथ-साथ गाजा और म्यांमार में मुसलमान पीड़ित हैं.
ईरानी नेता ने सोमवार को सोशल मीडिया साइट एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कहा, 'हम खुद को मुसलमान नहीं मान सकते, अगर हम म्यांमार, गाजा, भारत या किसी अन्य स्थान पर मुसलमानों द्वारा झेली जा रही पीड़ा के बारे में जानकारी नहीं रखते हैं.'
सोमवार को ही विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर खामेनेई के बयान को 'अस्वीकार्य' बताते हुए खारिज कर दिया. मंत्रालय ने कहा कि यह आरोप गलत जानकारी पर आधारित हैं.
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, 'हम ईरान के सर्वोच्च नेता की भारत में अल्पसंख्यकों के बारे में की गई टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हैं. ये गलत सूचनाएं हैं और अस्वीकार्य हैं.'
भारत ने ईरान को दिखा दिया आईना
मंत्रालय ने ईरान को आईना दिखाते हुए कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार पर इस तरह की टिप्पणी करने वाले देशों को कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए.

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