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संडे व्यू: थोपा गया युद्ध, भविष्य में भी आते रहेंगे एपस्टीन?

संडे व्यू: थोपा गया युद्ध, भविष्य में भी आते रहेंगे एपस्टीन?

The Quint
Sunday, March 01, 2026 10:44:41 AM UTC

Sunday View Best Opinion Articles on Quint Hindi: ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले से लेकर एपस्टीन फाइल सहित ब्रिटेन के पूर्व प्रिंस की गिरफ्तारी तक, पढ़ें इस रविवार मानव सचदेवा, करन थापर, तवलीन सिंह, अदिति फडणीस और शैफाली संध्या के विचारों का सार.

मानव सचदेवा इंडियन एक्सप्रेस में लिखते हैं कि 28 फरवरी की सुबह तेहरान के केंद्रीय इलाकों में विस्फोटों ने शहर को हिला दिया. इज़राइल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें आयतुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालयों के निकट इलाके प्रभावित हुए. इज़राइल ने इसे एहतियातन हमला बताया और अमेरिका ने इसका समर्थन किया. ईरान ने आपातकाल घोषित कर दिया और जवाबी कार्रवाई की तैयारी की. यह लेख इस हमले को पिछले अमेरिकी-नेतृत्व वाले अभियानों (अफगानिस्तान 2001, इराक 2003, सीरिया) से जोड़ते हुए इसकी निन्दा करता है. लेखक का तर्क है कि नैतिक स्पष्टता के नाम पर बमबारी से क्षेत्र ठीक नहीं हुआ, बल्कि टूटा है. ईरान की घरेलू दमनकारी नीतियां निर्विवाद हैं—प्रदर्शनों को कुचला गया, असहमति दंडित हुई—लेकिन इससे बाहरी हमलावरों को नैतिक छूट नहीं मिलती.

सीमित हमले भी नागरिकों की मौत का कारण बनते हैं, अस्पतालों को नुकसान पहुंचाते हैं. ईरान के मिसाइल/ड्रोन से जवाबी हमले, हिजबुल्लाह जैसे सहयोगियों से बहु-मोर्चा युद्ध दरपेश है. भौगोलिक—हॉर्मुज जलडमरूमध्य से विश्व का 1/5 तेल गुजरता है; युद्ध से तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं, वैश्विक मुद्रास्फीति, मंदी. रणनीतिक—ईरान के परमाणु/मिसाइल ठिकाने बिखरे, मजबूत; हमले से कार्यक्रम रुक सकता है, लेकिन समाप्त नहीं होता. उल्टे कट्टरपंथी मजबूत होते हैं, सुधारवादी कमजोर. इतिहास दिखाता है कि बमबारी से स्थिरता नहीं, अस्थिरता आती है. भारत के संदर्भ में: मोदी की इज़राइल यात्रा से रणनीतिक संबंध मजबूत, लेकिन भारत को पश्चिम एशिया से ऊर्जा और प्रवासी निर्भरता है. क्षेत्रीय युद्ध से तेल मूल्य, मुद्रास्फीति, रेमिटेंस प्रभावित. भारत को रणनीतिक स्वायत्तता और कूटनीति, संयम, अंतरराष्ट्रीय सत्यापन का समर्थन करना चाहिए, न कि एकतरफा बमबारी का.

करन थापर ने हिन्दुस्तान टाइम्स में लिखा है कि एंड्र्यू माउंटबेटन-विंडसर (पूर्व में प्रिंस एंड्र्यू) की 19 फरवरी 2026 को हुई गिरफ्तारी से लोग सकते में हैं. लेखक उस पीढ़ी से हैं जो उन्हें प्रिंस एंड्र्यू कहते थे, उन्हें स्वर्गीय रानी का प्रिय पुत्र, वर्तमान राजा चार्ल्स III का छोटा भाई और फॉकलैंड युद्ध का राष्ट्रीय नायक मानते थे. उनकी गिरफ्तारी—जेफ्री एपस्टीन से जुड़े गोपनीय सरकारी/व्यापार दस्तावेज साझा करने के संदेह में—एक ऐतिहासिक पतन है, जैसा शेक्सपियर के शब्दों में "ओह, क्या पतन हुआ था!". पुलिस कार में झुके, सदमे में उनकी तस्वीर अविश्वसनीय लगती है.

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