
संडे व्यू: जेडीयू के रंग में बीजेपी? ‘ऊर्जा’ पर खुली पोल!
The Quint
sunday view: बिहार की राजनीति पर अदिति फडणीस के विचारों से लेकर ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष के संदर्भ में भारत की ऊर्जा निर्भरता पर आर जगन्नाथ के विचारों तक, संडे व्यू में पढ़ें देश के नामचीन लेखकों के विचारों का सार.
बिजनेस स्टैंडर्ड में अदिति फडणीस ने लिखा है कि बीजेपी नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ईमानदारी, त्याग और सामाजिक न्याय के प्रति उनके समर्पण का पूरा सम्मान लोग करते हैं. लेकिन, बीजेपी बिहार में तेजी से आधुनिकीकरण और औद्योगीकरण भी चाहती है. नीतीश कुमार ने हमेशा बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का यह कहकर विरोध किया है कि इससे किसानों की आजीविका छिन जाएगी. बीजेपी नेताओं का मानना है कि इसी दृष्टिकोण के कारण बिहार आज शहरीकरण और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के मामले में देश के सबसे निचले राज्यों में से एक है.
अब राज्य के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कैसे किया जाए. क्या बिहार को बड़े उद्योगों को आकर्षित करने के लिए भूमि अधिग्रहण का कठिन रास्ता चुनना चाहिए या फिर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए? राज्य की 95% औद्योगिक इकाइयां MSME ही हैं जो कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार देती हैं. यह लेख इस बात पर विचार करता है कि आने वाले समय में क्या बीजेपी नीतीश कुमार के कृषि और सामाजिक न्याय-केंद्रित मॉडल के साथ चलेगी, या फिर बिहार को अपनी नई औद्योगिक और शहरीकरण की नीतियों के रंग में रंगेगी.
बिजनेस स्टैंडर्ड में आर जगन्नाथ ने लिखा है कि ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष के संदर्भ में भारत की ऊर्जा निर्भरता को दुनिया के फलक पर सामने लाता है. मुख्य तर्क यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) पर ईरान का नियंत्रण भारत की तेल-गैस आपूर्ति को 'गला घोंट' सकता है, क्योंकि भारत का अधिकांश पश्चिम एशियाई आयात इसी संकरे रास्ते से गुजरता है. बहरीन, कतर, ओमान, यूएई और सऊदी अरब जैसे प्रमुख उत्पादक देशों की आपूर्ति होर्मुज पर निर्भर है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है.
