
'वेनेजुएला ऑपरेशन ट्रंप की फौरी जीत, अमेरिका भुगतेगा अंजाम', बोले इयान ब्रेमर
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फेमस जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर (Ian Bremmer) ने खास बातचीत में अमेरिका के वेनेजुएला ऑपरेशन को लेकर चेतावनी जारी की. इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में ब्रेमर ने कहा कि 3 जनवरी को कराकस में हुआ यह ऑपरेशन उस दौर को दर्शाता है, जिसे वह 'G-Zero वर्ल्ड' यानी वैश्विक नेतृत्व विहीन दुनिया कहते हैं.
वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से जुड़े अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन को लेकर वैश्विक राजनीति में बहस तेज हो गई है. फेमस जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर (Ian Bremmer) ने चेतावनी दी है कि यह कदम भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए तात्कालिक राजनीतिक बढ़त दिलाए, लेकिन लंबे समय में अमेरिका को इसका अंजाम भुगतना होगा. इस कदम से अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय साख, नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था और उसके पारंपरिक गठबंधनों को गहरा नुकसान पहुंच सकता है.
इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में ब्रेमर ने कहा कि 3 जनवरी को कराकस में हुआ यह ऑपरेशन उस दौर को दर्शाता है, जिसे वह 'G-Zero वर्ल्ड' यानी वैश्विक नेतृत्व विहीन दुनिया कहते हैं. एक ऐसा समय जब वैश्विक नेतृत्व का अभाव है और अमेरिका स्वयं उस वैश्विक व्यवस्था से पीछे हट रहा है, जिसे उसने पहले बनाया था.
ब्रेमर के अनुसार, वॉशिंगटन अब जंगल के कानून को गले लगा रहा है, जहां नियम-कायदों और गठबंधनों के बजाय केवल कच्ची ताकत (Raw Power) को प्राथमिकता दी जा रही है. वेनेजुएला ऑपरेशन अकेला मामला नहीं है, ऐसे और भी उदाहरण देखने को मिलेंगे.
यूरैशिया ग्रुप के प्रमुख ब्रेमर ने स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यवस्था में आ रहा यह बदलाव केवल ट्रंप की वजह से नहीं है. उन्होंने कहा, "ट्रंप इस समस्या का कारण नहीं बल्कि इसके लक्षण हैं." उनके अनुसार, यह रुझान पिछले एक दशक से अधिक समय से बन रहा है और ट्रंप ने इसे केवल तेज (Accelerate) करने का काम किया है. उन्होंने 2012 में ही चेतावनी दी थी कि दुनिया G7 या G20 के नेतृत्व से हटकर एक ऐसे शून्य की ओर बढ़ रही है, जहां जिम्मेदारी लेने के लिए शीर्ष पर कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं होगा.
नियमों पर भारी पड़ी सैन्य ताकत
ब्रेमर ने कहा कि वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई ने वाशिंगटन के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें वह खुद को 'नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था' का रक्षक बताता है. इस सैन्य ऑपरेशन के लिए न तो अमेरिकी कांग्रेस को भरोसे में लिया गया और न ही अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से चर्चा की गई. हालांकि, उन्होंने यह भी नोट किया कि रूस, चीन और ईरान जैसे देशों की ओर से कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई है, जो पूरी तरह से अमेरिका की अद्वितीय सैन्य शक्ति के डर और प्रभाव को दर्शाता है.

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