
रूसी भाषा बोलने से लेकर मॉस्को के सपोर्ट तक, यूक्रेन के इन इलाकों में पनप रहे अलगाववादी, क्यों अब रूस के निशाने पर ये शहर?
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यूक्रेन के साथ लगभग तीन सालों से युद्ध कर रहे रूस के तेवर अचानक ज्यादा आक्रामक लगने लगे. बीते दिनों न केवल उसके हमलों में तेजी आई, बल्कि रूसी सेना यूक्रेन के पोक्रोवस्क शहर की तरफ बढ़ रही है. ये क्षेत्र लंबे वक्त से मॉस्को के एजेंडा में रहा. यह उन अलगाववादियों का गढ़ है, जो रूस को सपोर्ट करते हैं.
तीन साल पहले फरवरी में रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुई जंग अब तक जारी है. बीच-बीच में लड़ाई धीमी पड़ जाती है लेकिन हाल में रूस के अटैक में काफी तेजी आई. उसकी सेना के निशाने पर पोक्रोवस्क शहर है. इस शहर समेत एक पूरा क्षेत्र लंबे समय से रूसी सेना की प्राथमिकता रहा, जिससे यूक्रेन पर उनकी पकड़ मजबूत हो सके.
पोक्रोवस्क शहर की स्थिति इसे सामरिक तौर पर काफी अहम बना देती है. ये इलाका रसद की आपूर्ति के लिए सेंटर पॉइंट का काम करता रहा. ऐसे में अगर ये शहर रूसी आर्मी के कब्जे में आ गया, तो एक बड़ा किला फतह हो जाएगा. लेकिन इसपर काबू पाने की कोशिश के पीछे एक बड़ा कारण और भी है. इस शहर और आसपास के बड़े इलाके में रूस समर्थक लोग बसते हैं, जो खुद को यूक्रेन से अलग मानते रहे.
क्यों है यूक्रेन के साथ-साथ रूस के लिए भी जरूरी पोक्रोवस्क यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सड़क और रेल केंद्र रहा. लड़ाई से पहले यहां की आबादी लगभग साठ हजार थी, जो अब घटते हुए दस हजार से कुछ ज्यादा ही बाकी है. शहर का महत्व इसलिए भी बेहद ज्यादा है क्योंकि ये आपूर्ति मार्ग की तरह काम करता रहा, यानी जरूरत की चीजें यहां से वहां पहुंचाने में मदद. ये शहर एक तरह का गढ़ रहा, जहां से बैठकर यूक्रेन की सेना लड़ाई में टूट चुके शहरों तक जरूरी चीजों की आपूर्ति करती रही. शहर यूक्रेन के उस भाग में आता है, जिसे डोनेट्स्क कहते हैं. रूस के बॉर्डर पर बसा होने की वजह से इसका रणनीतिक महत्व काफी ज्यादा रहा.
खुद को रूस के करीब मानने वाले ज्यादा डोनेट्स्क एरिया में रशियन बोलने वालों का प्रतिशत ज्यादा है जो खुद को रूस के करीब मानते हैं. आखिरी सेंसस के मुताबिक, डोनेट्स्क की लगभग 75 फीसदी जनसंख्या रूसी बोलती है. वे कल्चरली भी रूस से जुड़े हुए हैं. साल 2014 में रूस-यूक्रेन संघर्ष के पहले यहां के लोग रूस के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की वकालत करते रहे. हालांकि संघर्ष के बाद दोनों देशों की दूरियां बढ़ीं, इस दौरान इस पूरे इलाके के लोग रूस से और भी ज्यादा जुड़ने लगे.
साल 2014 में क्रीमिया के रूस में विलय के बाद यहां के लोग खुलकर मॉस्को के सपोर्ट में आने लगे. यूक्रेनी सेना और रूसी सपोर्टरों के बीच भारी जंग भी हो चुकी.

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