
मादुरो को अपनों ने लूटा! पांच किरदार जिनसे वेनेजुएला के राष्ट्रपति को मिला धोखा
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वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस हाई-प्रोफाइल सैन्य कार्रवाई के पीछे अपनों का विश्वासघात और कूटनीतिक सौदेबाजी की छिपी हुई थ्योरी सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि मादुरो को चीन, रूस और ईरान जैसे दोस्तों के साथ-साथ उनके अपने सुरक्षाकर्मी ने भी धोखा दिया.
अमेरिकी सेना ने तीन जनवरी को ऑपरेशन 'एब्सोल्यूट रिजॉल्व' लॉन्च कर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को काराकस से पकड़ा. अमेरिकी सेना मादुरो दंपति को गिरफ्तार कर अपने साथ अमेरिका ले गई.
मादुरो के इस हाल के पीछे कई कारण हैं, लेकिन हम आपको उन पांच किरदारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने मादुरो को धोखा दिया. किसी के हथियारों ने धोखा दे दिया तो किसी की ज़ुबान ने, तो किसी ने भरोसा जीतकर उनके साथ ऐसा विश्वासघात किया, जिसे वो कभी नहीं भूल पाएंगे.
चीन की भूमिका संदिग्ध बताया जा रहा है कि मादुरो के इस हाल का सबसे पहला किरदार चीन का है, क्योंकि 2 और 3 जनवरी की दरमियानी रात जब अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई की, तब उससे कुछ देर पहले चीन के अधिकारियों ने अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस और उनकी पत्नी से मुलाकात की थी. लेकिन चीन की खुफिया एजेंसी मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि इस मुलाकात के बाद देर रात अमेरिका इतना बड़ा हमला करने वाला है. इसी बीच एक थ्योरी ये भी सामने आई कि क्या अमेरिका और चीन के बीच पर्दे के पीछे कोई डील हुई थी, जिसके बाद मादुरो की लोकेशन अमेरिकी एजेंसियों तक पहुंची. आरोप है कि खुद चीन ने ही अमेरिका को उनका ठिकाना बताया, अगर ऐसा है तो ये मादुरो के लिए सबसे बड़ा कूटनीतिक झटका माना जाएगा.
भरोसेमंद सुरक्षाकर्मी का बड़ा विश्वासघात इस कड़ी में दूसरा किरदार है उस सुरक्षाकर्मी का, जिस पर निकोलस मादुरो काफी विश्वास करते थे. मादुरो और उनकी पत्नी को पहले से आशंका थी कि अमेरिका उन्हें गिरफ्तार करने के लिए सैन्य ऑपरेशन चला सकता है और राष्ट्रपति ट्रंप ने निकोलस पर 451 करोड़ रुपये का इनाम भी रखा था और इस वजह से मादुरो कभी-भी एक जगह पर नहीं रहते थे और उन्होंने अपनी सुरक्षा में भी कई बड़े बदलाव किए थे. CNN के मुताबिक निकोलस मादुरो किसी भी जगह पर दो दिन से ज्यादा नहीं रुकते थे और पिछले छह महीने में कई बार ऐसा हुआ, जब उन्होंने 4 से 5 घंटे बाद ही अपने ठिकाने को बदल दिया. लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और इससे ये भी पता चलता है कि अमेरिका ने बड़े स्तर पर निकोलस मादुरो के खिलाफ जासूसी ऑपरेशन चलाया था.
पालतू जानवरों और ड्रोन्स से जासूसी वहीं, डेली मेल की एक रिपोर्ट में ये भी दावा है कि निकोलस ने जो कुत्ते और बिल्ली अपने घर में पाले हुए थे, उनकी मदद से अमेरिकी जासूस ये पता लगाते थे कि कब निकोलस अपने ठिकाने बदल रहे हैं. वो राजधानी में जहां भी जाते थे, वहां उनका पीछा होता था और इस दौरान ड्रोन्स से भी उन पर नजर रखी जाती थी. इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि मादुरो को एक ऐसे सुरक्षाकर्मी ने धोखा दिया, जिस पर वो सबसे ज्यादा भरोसा करते थे. दावा है कि जब मादुरो ने जासूसी के डर से अपने सुरक्षा घेरे को छोटा किया, तब उन्होंने इसी सुरक्षाकर्मी से चर्चा की थी. लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि यही सुरक्षाकर्मी उनके बारे में सारी जानकारी CIA के एजेंट्स को दे रहा है. इससे एक बार फिर ये साबित होता है कि जो आपके सबसे करीब होता है. वही आपको धोखा देता है. अजनबी तो सिर्फ़ बाहर से चोट पहुंचाता है, लेकिन जो अपना है वो आपके सारे राज जानता है और वही आपके साथ छल करता है और मादुरो के साथ भी यही हुआ. हिंदी की एक लोकप्रिय कहावत है कि हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था और मादुरो के साथ यही हुआ है.
रूस के हथियारों ने तोड़ा मादुरो का घमंड इस कड़ी में तीसरा किरदार है रूस का है. वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो इसलिए राष्ट्रपति ट्रंप के सामने झुकने को तैयार नहीं थे, क्योंकि उन्होंने रशिया के हथियारों पर काफी भरोसा था. उन्हें लगता था कि अगर अमेरिका की सेना वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई करेगी तो रशिया का ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम S-300 उन्हें बचा लेगा, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हुआ और राष्ट्रपति मादुरो जिस रूसी एयर डिफेंस सिस्टम पर घमंड कर रहे थे. वही, असली टकराव में बेअसर साबित हुआ.

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