
मजीद फिदायीन ब्रिगेड, फतह स्क्वाड और जीरब यूनिट... BLA के वो दस्ते जिन्होंने पाक आर्मी की नींद हराम कर दी!
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भारत से हार के बाद खार खाए तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो क्वेटा के दौरे पर आने वाले होते हैं. पेड़ पर चढ़ा युवक एक मौके का इंतजार कर रहा होता है. उसके हाथ में हैंड ग्रेनेड है. वो किसी पल भी ब्लास्ट करने वाला है. इस फिदायीन के टारगेट पर हैं भुट्टो. इस लड़के का नाम था मजीद सीनियर. मजीद भुट्टो से बदला लेना चाहता था. मजीद ब्रिगेड की कहानी यहीं से शुरू होती है.
दो सगे भाई मजीद सीनियर, मजीद जूनियर. दोनों ही बलोच राष्ट्रवाद की आग में तपते हैं. एक आजाद मुल्क का सपना लिए. दोनों ही इस काउज के लिए कुर्बान होते हैं. लेकिन इन दो भाइयों की कुर्बानियां अलग बलूचिस्तान की मांग में ईंधन का काम करती हैं. फिर पाकिस्तानी सेना का सामना करने के लिए बलूचिस्तान की मिट्टी से पनपता है खूंखार फिदायीन दस्ता मजीद ब्रिगेड. ये वही ब्रिगेड है जिसने क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया है.
2 अगस्त 1974. स्थान-क्वेटा. एक पेड़ पर चढ़ा युवक एक मौके का इंतजार कर रहा होता है. उसके हाथ में हैंड ग्रेनेड है. वो किसी पल भी ब्लास्ट करने वाला है. इस फिदायीन के टारगेट पर हैं पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो. जो एक जलसे में शामिल होने क्वेटा आए थे. इस लड़के का नाम था मजीद सीनियर. मजीद भुट्टो से बदला लेना चाहता था.
मजीद ब्रदर्स की कुर्बानी और फिदायीन दस्ते की कहानी
भुट्टो ने बलूचिस्तान में बलोच हक की बात करने वाली नेशनल आवामी पार्टी की सरकार को बर्खास्त कर दिया था. गौरतलब है कि बलूचिस्तान तो 1947 के बाद से ही एक अलग देश के रूप में अपना वजूद रखना चाहता था. लेकिन तब मुहम्मद अली जिन्ना ने ताकत के दम पर इस सूबे का पाकिस्तान में विलय करा लिया.
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बलूचिस्तान की नेशनल आवामी पार्टी अब बलोचों के हक और हुकूक के लिए लड़ती थी. पार्टी चाहती थी कि बलोचिस्तान को अधिक क्षेत्रीय स्वायत्तता मिले. 1971 में बांग्लादेश के अलग होने से उनकी मांग ने और भी रफ्तार पकड़ ली.

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