
मजबूरी या जरूरत... भारत के साथ बातचीत की टेबल पर आने को क्यों बेचैन है पाकिस्तान?
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत से बातचीत की पेशकश की है. शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान गंभीर मुद्दों पर बात करने के लिए तैयार है. ऐसे में जानते हैं कि पाकिस्तान आखिर भारत से बातचीत करने के लिए इतना बेचैन क्यों हैं? और क्या भारत उसपर भरोसा कर सकता है? जानते हैं...
कहते हैं- जब कंगाली दरवाजे से अंदर आती है तो सारी अकड़ खिड़की के रास्ते बाहर निकल जाती है. कुछ ऐसा ही पाकिस्तान के साथ हो रहा है. अब जब पाकिस्तान बुरी तरह आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, तो ऐसे में उसने भारत से बातचीत की पहल शुरू की है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत से बातचीत की पेशकश की है. शरीफ ने कहा, 'हम सबसे बात करने के लिए तैयार हैं. यहां तक कि अपने पड़ोसी के साथ भी. बशर्ते कि पड़ोसी मेज पर गंभीर मुद्दों पर बात करने के लिए गंभीर हो. क्योंकि जंग अब कोई समाधान नहीं है.'
प्रधानमंत्री शरीफ ने ये भी कहा कि जब तक अनसुलझे मुद्दों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक हम दोनों 'सामान्य पड़ोसी' नहीं बन सकते.
शहबाज शरीफ का ये बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान लगभग डेढ़ साल से राजनीतिक और आर्थिक संकट में फंसा हुआ है. शहबाज शरीफ इससे पहले भी भारत से बातचीत की पेशकश कर चुके हैं.
क्या भारत मानेगा शरीफ की बात?
फिलहाल, इस बात की कोई गुंजाइश नहीं है. इसी साल जून में दिल्ली में एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि आतंकवाद को किसी भी हाल में मंजूरी नहीं दे सकते. हम नहीं चाहते कि पाकिस्तान के साथ बातचीत का आधार आतंकवाद हो.

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