
फ्री बिजली-पानी, मोहल्ला क्लीनिक, सरकारी स्कूल... AAP के वो फैसले जिनका विधानसभा चुनाव पर होगा सीधा असर
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AAP ने अपनी स्थापना से लेकर अब तक कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर कई कदम शामिल हैं. अब अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर आतिशी मार्लेना को अपना उत्तराधिकारी नामित किया है. क्या यह फैसला पार्टी की चुनावी रणनीति को एक नया मोड़ दे पाएगा?
आम आदमी पार्टी (आप) ने 2012 में अपनी स्थापना के बाद से भारतीय राजनीति में, पहले दिल्ली और फिर बाद में पंजाब में, एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है. अन्ना हजारे द्वारा चलाए गए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उभर कर आई AAP ने पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों को चुनौती दी थी. राजनीतिक पहचान बनाने के बाद AAP ने अब तक कई फैसले लिए, जो इसके भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण साबित हुए. आज अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर आतिशी को अपने उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तावित किया. इस फैसले के बाद AAP एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. आइए, जानते हैं पार्टी के गठन से लेकर अब तक के वो अहम फैसले, जो अरविंद केजरीवाल को आगामी चुनाव में जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकते हैं.
AAP की स्थापना
नवंबर 2012 में अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम ने औपचारिक रूप से आम आदमी पार्टी की स्थापना की. यह फैसला अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकला, लेकिन हजारे के आंदोलन ने राजनीतिक रास्ता नहीं अपनाया. इसके विपरीत AAP ने चुनाव लड़ने और अपनी विचारधारा को शासन के जरिए लागू करने का लक्ष्य रखा. इस फैसले ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को राजनीतिक पार्टी के रूप में बदल दिया.
2013 दिल्ली विधानसभा चुनाव और AAP की एंट्री
2013 में AAP ने पहली बार दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ा और 70 में से 28 सीटों पर जीत दर्ज की. पार्टी ने भले ही बहुमत नहीं हासिल किया, लेकिन कांग्रेस पार्टी के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई. अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और यह AAP का मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश का संकेत था. यह जीत एक महत्वपूर्ण क्षण था, क्योंकि इसने दिखाया कि एक नई पार्टी भी स्थापित राजनीतिक दलों को चुनौती दे सकती है.
महज 49 दिनों में इस्तीफा

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