पाकिस्तान के पूर्व PM इमरान खान रावलपींडी पहुंचे, गोली लगने के बाद पहली बार करेंगे रैली
AajTak
3 नवंबर को रैली के दौरान गोली लगने के बाद से ही 70 वर्षीय इमरान खान का इलाज चल रहा है. इसके बाद पहली बार वह किसी रैली को संबधित करने पहुंचे हैं. यहां रावलपिंडी में वे अपने समर्थकों के साथ पाकिस्तान की जनता से नए सिरे से आम चुनाव कराने की मांग को लेकर रैली को आगे जारी रखेंगे.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान शनिवार को एक विशाल रैली को संबोधित करने हेलीकॉप्टर से रावलपिंडी पहुंचे. इस दौरान उनके साथ डॉक्टरों की एक टीम भी मौजूद है. दरअसल, 3 नवंबर को रैली के दौरान गोली लगने के बाद से ही 70 वर्षीय इमरान खान का इलाज चल रहा है. इसके बाद पहली बार वह किसी रैली को संबधित करने पहुंचे हैं. यहां रावलपिंडी में वे अपने समर्थकों के साथ पाकिस्तान की जनता से नए सिरे से आम चुनाव कराने की मांग को लेकर रैली को आगे जारी रखेंगे.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष खान यहां बरनी विश्वविद्यालय के हेलीपैड पर उतरे, जहां से वह रैली स्थल की ओर बढ़ेंगे. डॉन अखबार के मुताबिक, पीटीआई नेता फैसल जावेद ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि खान रावलपिंडी पहुंचे हैं और जल्द ही पार्टी के समर्थकों को संबोधित करने के लिए मंच पर होंगे.
पाकिस्तानी चैनल जियो टीवी ने शनिवार को बताया कि रावलपिंडी पुलिस ने पीटीआई के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर पूर्व प्रधानमंत्री के लिए वीआईपी सुरक्षा प्रावधान के निर्देशों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. पत्र में कहा गया है कि खान को बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने की, रैली स्थल के रास्ते में वाहन से बाहर नहीं निकलने और अपनी गतिविधियों को गुप्त रखने की भी सलाह दी गई है.
बताया गया है कि खान लाहौर में अपने जमान पार्क आवास से स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब एक बजे बुलेट प्रूफ वाहन से निकले. सुरक्षा के मद्देनजर उनके घर पहले से ही बुलेटप्रूफ जैकेट भेजी गई थी.
वहीं एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया कि पीटीआई नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के काफिले हकीकी आज़ादी मार्च के लिए रावलपिंडी जा रहे हैं. पीटीआई महासचिव असद उमर ने कहा कि सभा "ऐतिहासिक" होगी. खान के समर्थक देश के कोने-कोने से इस्लामाबाद के जुड़वां बहन शहर रावलपिंडी पहुंचने के लिए आगे बढ़ रहे हैं, जहां ऐतिहासिक मरी रोड के बीच में सिक्स्थ रोड फ्लाईओवर पर एक मंच तैयार किया गया है.
पीटीआई के सीनेटर आजम खान स्वाति ने कहा कि 'हकीकी आजादी' आंदोलन अपने गंतव्य तक पहुंचने के रास्ते पर है. पीटीआई द्वारा अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर साझा किए गए एक वीडियो मैसेज में स्वाति ने कहा, "सत्ता परिवर्तन के सभी पात्रों को भगवान अपमानित करेगा और स्वतंत्रता आंदोलन का यह कारवां रुकने वाला नहीं है."

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








