
नेतन्याहू सरकार, सख्त नीतियां, गाजा और... अमेरिकी समर्थन के बावजूद इजरायल के सामने विश्वसनीयता का संकट!
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अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्ध के नियमों का पालन करने वाले लोकतंत्र होने के अपने तमाम दावों के बावजूद इजरायल की वैश्विक प्रतिष्ठा तार-तार हो रही है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पर पूर्ण सैन्य कब्जा करने की योजना तैयार की है. गाजा पट्टी में बढ़ते भुखमरी संकट और पश्चिमी तट पर इजरायल के दमनकारी उपायों के साथ विश्वसनीयता का संकट देश के सामने है. अमेरिकी समर्थन के बावजूद यहूदी राष्ट्र इस संकट का सामना कर रहा है, जिससे वह लंबे समय तक उबर नहीं पाएगा.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पर सैन्य कब्जे की योजना बनाई है, इसी के साथ देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है. एक समय जब इजरायल को लोकतांत्रिक राज्य माना जाता था, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्ध के नियमों का पालन करता है, आज उसकी प्रतिष्ठा हिंसा, मानवीय त्रासदी और बढ़ती वैश्विक निंदा के बीच प्रभावित हो रही है.
एजेंसी के अनुसार, नेतन्याहू की यह रणनीति हमास को पूरी तरह खत्म करने के लिए गाजा में व्यापक सैन्य अभियान चलाने की है. इसके साथ-साथ गाजा में जारी नाकेबंदी के कारण वहां भुखमरी की स्थिति है, जिससे आम नागरिकों का जीवन खतरे में है. वेस्ट बैंक में सुरक्षा कड़काई से भी तनाव बढ़ा है.
अमेरिका का समर्थन मिलने के बावजूद इजरायल ने अपने कई पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को खो दिया है और वह अब वैश्विक कूटनीति में कटघरे में है. इसका विश्वसनीयता संकट लंबी अवधि तक रह सकता है.
प्यू रिसर्च सेंटर के ताजा सर्वे से पता चलता है कि इजरायल की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंच रहा है. नीदरलैंड (78% नकारात्मक), जापान (79%), स्पेन (75%), ऑस्ट्रेलिया (74%), तुर्की (93%) और स्वीडन (75%) जैसे देशों में अधिकांश जनता के बीच इजरायल के प्रति नकारात्मक सोच बढ़ी है. यह इस बात का संकेत है कि दुनिया इजरायल की सैन्य कार्रवाई और गाजा के नागरिकों पर प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता में है.
इंटरनेशनल कोर्ट ने नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलांट के खिलाफ युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं. मानवाधिकार संगठन और जेनोसाइड विशेषज्ञ भी इजरायल पर गाजा में नरसंहार करने का आरोप लगा चुके हैं.
देश के भीतर आलोचना

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