
धर्मेंद्र की ये फिल्म देखकर अपराधी बनने से बच गया बॉलीवुड का पॉपुलर राइटर, मिला था नेशनल अवॉर्ड
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धर्मेंद्र अब अधिकतर लोगों को गरम-धरम या 'हीमैन' जैसे एक्शन अवतारों के लिए ही याद रहते हैं. मगर धर्मेंद्र के खाते में कुछ ऐसी फिल्में हैं जो उनकी लगती ही नहीं हैं. इनमें उनकी एक्टिंग का दम देखने लायक है. 'सत्यकाम' भी ऐसी ही थी. इस फिल्म में उनका किरदार और काम कितना दमदार था, पढ़िए इस कहानी में.
बॉलीवुड के आइकॉन्स में से एक, वेटरन एक्टर धर्मेंद्र को लोग अधिकतर उनके पावरफुल एक्शन हीरो अवतार के लिए याद रखते हैं. अपनी दमदार कद-काठी, चौड़े सीने और मजबूत हाथों के साथ विलेन के सामने धर्मेंद्र को खड़ा देखते ही दर्शकों का खून उबाल मारने लगता था. मगर उनकी शख्सियत और ऑनस्क्रीन इमेज की इस पॉपुलैरिटी का एक नुकसान भी हुआ.
सुपरस्टार शब्द का पूरा भौकाल समेटे हुए, एक्शन हीरो इमेज वाले धर्मेंद्र, गंभीर और ठोस एक्टिंग परफॉरमेंस वाले धर्मेंद्र पर भारी पड़ गए. धर्मेंद्र की बिना टिपिकल बॉलीवुडिया तामझाम में डूबी, विशुद्ध दमदार एक्टिंग वाली फिल्में कम ही याद रहती हैं. मगर उनकी ऐसी एक फिल्म 'सत्यकाम' एक आइकॉनिक फिल्म है. इसमें धर्मेंद्र की सॉलिड एक्टिंग ने, उनके किरदार में इस कदर जान फूंक दी थी कि आइकॉनिक एक्टर, स्वर्गीय फारुख शेख ने कहा था वो जब भी 'सत्यकाम' देखते हैं, ये फिल्म उन्हें झिंझोड़ कर रख देती है.
फिल्म इंडस्ट्री के जानेमाने राइटर रंजित कपूर पर इस फिल्म का क्या असर हुआ था उसकी एक अलग ही कहानी है. रंजित ने बताया था कि करियर की शुरुआत में उनका संघर्ष जब कोई फल नहीं दे रहा था तो वो अपराध की राह पर जाने वाले थे मगर 'सत्यकाम' ने उन्हें बचा लिया था. चलिए बताते हैं ये किस्सा...
क्यों अपराध की राह पर जाने वाले थे रंजित कपूर 'जाने भी दो यारों' (1983), शाहरुख खान की 'कभी हां कभी ना' (1994) और 'खाकी' (2004) जैसी कई फिल्मों में डायलॉग लिख चुके रंजित कपूर, बॉलीवुड के बड़े राइटर्स में गिने जाते हैं. लेकिन बतौर राइटर इस शानदार करियर की शुरुआत रंजित के लिए बहुत संघर्षों भरी रही थी. एक समय ऐसा भी आया था जब वो अपराध के रास्ते पर जाने वाले थे. और तब ऋषिकेश मुखर्जी की डायरेक्शन में बनी, धर्मेंद्र की फिल्म 'सत्यकाम' ने उनका हाथ पकड़ कर उन्हें रोक लिया.
'द वर्ल्ड ऑफ ऋषिकेश मुखर्जी' में, राइटर जय अर्जुन सिंह ने रंजित का जीवन बदल देने वाले इस मोमेंट का जिक्र किया है. रंजित ने डिटेल्स का खुलासा किए बिना उन्हें बताया, 'मैं गलत रास्ते पर जाने वाला था.' बात आगे बढ़ाते हुए रंजित ने कहा, 'मैं एक दोस्त के साथ था, हमें बस थोड़ा वक्त काटना था और ('सत्यकाम' के) टिकट टैक्स फ्री थे.'
रंजित के साथ उनका एक दोस्त भी था जो इस धीमी फिल्म से ऊबकर सो गया, मगर वो हॉल में बैठे, बिना आवाज किए रो रहे थे. 'वो फिल्म देखने के बाद दुनिया एक बहुत अलग जगह लगने लगी— मैं एकदम नीचे गिर चुका था, मगर मैंने खुद को फिर से उठाया.' रंजित ने फिर से संघर्ष शुरू किया और वो राइटर बने, जिसका बॉलीवुड में अपना एक ऊंचा दर्जा है.

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