
तालिबान ने सरकारी अधिकारियों को दी ‘माफी’, बयान में कहा- अब रूटीन लाइफ पर लौटें
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अफगानिस्तान (Afghanistan) पर पूरी तरह से कब्जा जमाने के बाद तालिबान (Taliban) ने अब सरकारी अधिकारियों से खास अपील की है. तालिबान ने अपने एक बयान में कहा है कि वह सभी सरकारी अधिकारियों को ‘माफी’ दे रहे हैं.
अफगानिस्तान (Afghanistan) पर पूरी तरह से कब्जा जमाने के बाद तालिबान (Taliban) ने अब सरकारी अधिकारियों से खास अपील की है. तालिबान ने अपने एक बयान में कहा है कि वह सभी सरकारी अधिकारियों को ‘माफी’ दे रहे हैं. अब तालिबान ने सभी सरकारी अधिकारियों से अपील की है कि वे सभी काम पर लौटें, अपना रूटीन काम शुरू करें और भरोसे के साथ आगे बढ़ें. बता दें कि अफगानिस्तान पर दो दिन पहले तालिबान ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया. काबुल में राष्ट्रपति पैलेस में तालिबान ने कब्जा जमा लिया था और उसके बाद से ही काबुल समेत अफगानिस्तान के दूसरे इलाकों में भगदड़ का माहौल है. ऐसे में अब देश को फिर से रास्ते पर लाने के लिए तालिबान की ओर से ऐसी अपील की जा रही है. बता दें कि तालिबानियों ने पहले भी लोगों से कहा है कि कोई भी देश छोड़कर ना जाए और यहां पर ही रुका रहे. #UPDATES "A general amnesty has been declared for all ... so you should start your routine life with full confidence," says statement from the Taliban, two days after they took power following a lightning sweep through the country pic.twitter.com/knKDIjdCfm
ईरान और अमेरिका की जंग का आज 19वीं दिन है. इस बीच इजरायल के हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ लीडर अली लारिजानी की मौत के बाद अब ईरान ने इजरायल और अमेरिकी बेसों पर हमले तेज कर दिए हैं. ईरान ने मिसाइल हमलों का वीडियो भी जारी किया है. IRGC ने कहा कि हमले में मल्टी-वॉरहेड बैलिस्टिक मिसाइलों समेत कई और घातक मिसाइलें शामिल हैं.

अमेरिका ने होर्मुज के समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से हमला किया है. अमेरिकी राष्पति ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि उनके साथी देश (नाटो) इस लड़ाई में साथ नहीं दे रहे हैं. इस हमले का मकसद तेल की सप्लाई को बहाल करना और ईरानी मिसाइलों के खतरे को खत्म करना है.

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां आक्रामक रुख अपनाया है, वहीं कई सहयोगी देश सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाकर कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं. ब्रिटेन के ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिसे लेकर ट्रंप भड़क गए हैं.

इज़रायल ने दावा किया है कि ईरान की नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी का भी खात्मा कर दिया है. अली लारीजानी को ईरान का De Facto Leader भी कहा जाता था, जो असल में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद पूरे देश की सत्ता संभाल रहे थे. शुक्रवार को उन्हें आखिरी बार तेहरान के उस जुलूस में देखा गया था, जो फिलिस्तीन की आज़ादी के लिए निकाला जा रहा था. उस जुलूस में अली लारीजानी ने तेहरान की सड़कों पर उतरकर अमेरिका और इज़रायल को खुली चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि ईरान के नेता छिपकर डरने वालों में से नहीं है और उसी दिन उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के लिए भी ये कहा था कि इस युद्ध में वो खुद को बचाकर रखें. उस वक्त ऐसा माना गया कि अली लारीजानी खुल्लम-खुल्ला राष्ट्रपति ट्रंप को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और दावा है कि इसी के बाद इज़रायल'और अमेरिका दोनों ने मिलकर उनका डेथ वॉरंट लिख दिया.

महायुद्धघ का आज 18वा दिन है. जहां मिसाइल-बम-रॉकेट के बीच इस वक्त सस्पेंस, थ्रिलर और सवालों की पहेली भी उलझती जा रही है. ईरान से जंग शुरू करने की अमेरिका में विरोध शुरू हो गया है अमेरिका की काउंटर टेरिरज्म सेंटर के निदेशक ने ईरान से युद्ध के विरोध में इस्तीफा दे दिया है. जो कैंट नाम के अफसर ने ट्रंप पर इजरायल के दबाव में युद्ध शुरू करने का आरोप लगाया. दावा किया कि ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं है. इस अफसर ने अमेरिका में यहूदी लॉबी को भी आड़े हाथों लिया.








