
ट्रेनिंग की कमी, ड्रोन अटैक में माहिर सेना... रूस की बजाय उत्तर कोरियाई सैनिक क्यों बन रहे यूक्रेन के आसान शिकार?
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दुनिया की सबसे बड़ी स्टैंडिंग सेनाओं में से एक होने के बावजूद, उत्तर कोरियाई सैनिकों के पास युद्ध के मैदान की विशेषज्ञता की कमी है क्योंकि तानाशाही शासन ने कई साल से कोई युद्ध नहीं लड़ा है.
यूक्रेन और दक्षिण कोरिया ने कुर्स्क क्षेत्र में रूस के लिए लड़ रहे उत्तर कोरियाई सैनिकों को मिली असफलताओं पर विरोधाभासी डेटा जारी किया है. जबकि साउथ कोरिया ने दावा किया है कि यूक्रेनी बलों द्वारा करीब एक हजार उत्तर कोरियाई सैनिक मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं. जेलेंस्की का दावा है कि उनकी सेना ने आज तक करीब 3 हजार उत्तर कोरियाई लोगों को मार डाला है या घायल कर दिया है.
एक हफ्ते पहले, दक्षिण कोरिया की जासूसी एजेंसी ने दावा किया था कि दिसंबर के दौरान कुर्स्क में अग्रिम मोर्चे पर तैनात होने के बाद से करीब 100 उत्तर कोरियाई सैनिकों की मौत हो चुकी है. हताहतों की तादाद में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो तीन हजार तक बताई जा रही है. कई एक्सपर्ट्स की चिंताएं सही साबित हो रही हैं.
दुनिया की सबसे बड़ी स्टैंडिंग सेनाओं में से एक होने के बावजूद, उत्तर कोरियाई सैनिकों के पास युद्ध के मैदान की विशेषज्ञता की कमी है क्योंकि तानाशाही शासन ने कई साल से कोई युद्ध नहीं लड़ा है.
उत्तर कोरिया में नहीं युद्ध का मैदान
युद्ध अभ्यास सैनिकों को रियल एक्शन के लिए नहीं तैयार कर सकता है. रूस तैनाती से पहले अपने प्योंगयांग सेना को सही ट्रेनिंग देने में कामयाब नहीं रहा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद भाषा की बाधा आती है, जो रूस और कोरिया के लोगों के बीच प्रभावी संचार को प्रभावित करती है.
हालांकि, उत्तर कोरियाई लोग मोटिवेटेड हैं, लेकिन उन्हें आधुनिक युद्ध के बारे में कुछ भी नहीं पता. ज्यादातर मौतें यूक्रेनी ड्रोन की वजह से हुई हैं. The Guardian के मुताबिक, कुर्स्क के जंगलों में मिसाइलों और ट्रेनिंग हादसों में भी लोगों की जान गई है, जिनमें एक जनरल की मौत भी शामिल है.

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