
ट्रंप की नई कैबिनेट में एक और भारतवंशी की एंट्री, हरमीत ढिल्लों चुनी गईं असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल
AajTak
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ढिल्लों की सराहना की. उन्होंने कहा कि ढिल्लों ने फ्री स्पीच सेंसशिप के लिए आवाज उठाते हुए टेक कंपनियों को आडे़ हाथों लिया. इतना ही नहीं उन्होंने अपने सहकर्मियों के साथ भेदभाव करने वाली नीतियों को लेकर कॉरपोरेट के खिलाफ कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया है.
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और भारतवंशी को अपनी नई कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी दी है. उन्होंने भारतवंशी अमेरिकी वकील हरमीत के. ढिल्लों को न्याय विभाग में असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल के तौर पर चुना गया है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ढिल्लों की सराहना की. उन्होंने कहा कि ढिल्लों ने फ्री स्पीच सेंसरशिप के लिए आवाज उठाते हुए टेक कंपनियों को आडे़ हाथों लिया. इतना ही नहीं उन्होंने अपने सहकर्मियों के साथ भेदभाव करने वाली नीतियों को लेकर कॉरपोरेट के खिलाफ कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया है.
ट्रंप ने कहा कि हरमीत देश की शीर्ष इलेक्शन अटॉर्नी में से एक हैं. वह सिख समाज से जुड़ी हुई हैं. न्याय विभाग में नई भूमिका के साथ वह संवैधानिक अधिकारों की रक्षक भी होंगी.
कौन हैं हरमीत के. ढिल्लों
हरमीत ढिल्लों का जन्म दो अप्रैल 1969 को चंडीगढ़ में हुआ था. वह जब दो साल की थीं तो उनका परिवार चंडीगढ़ से अमेरिका शिफ्ट हो गया था. उनका लालन-पालन अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में हुआ. लेकिन बाद में वह न्यूयॉर्क सिटी शिफ्ट हो गईं.
हरमीत ने डार्थमाउथ कॉलेज से अंग्रेजी में ग्रेजुएट किया. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत लॉ क्लर्क के तौर पर की. उन्होंने बाद में वह न्याय विभाग के कॉन्स्टीट्यूशनल टॉर्ट्स सेक्शन के लिए काम किया. बाद में उन्होंने 2006 में अपनी खुद की लॉ फर्म ढिल्लों लॉ ग्रुप की स्थापना की.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.

दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ रही है. अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय नीतियां विवादों में हैं, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की तुलना हिटलर की तानाशाही से की जा रही है. वेनेज़ुएला पर हमला करने और ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की धमकी के बाद अमेरिका ने यूरोप के आठ NATO देशों पर टैरिफ लगाया है.








