
जिस ग्रीनलैंड को ट्रंप टारगेट कर रहे, दशकों पहले वहां जबरन रोकी गई थी आबादी, क्या है कॉइल स्कैंडल का सच?
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वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप की नजरें ग्रीनलैंड पर हैं. उनका तर्क है कि सुरक्षा वजहों से अमेरिका के पास ग्रीनलैंड होना ही चाहिए. ट्रंपियन जिद से चर्चा में आया देश कुछ साल पहले भी चर्चा में था, जब वहां की टीनएज लड़कियों पर चुपके से हुए प्रयोग की पोल खुली थी.
अमेरिका ने हाल में वेनेजुएला पर सैन्य हमला करते हुए वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया. इसके बाद से खुला खेल चल रहा है. ट्रंप के निशाने पर कई देश हैं, जिनमें से एक ग्रीनलैंड भी है. बर्फीली वादियों वाले इस देश की आमतौर पर कोई चर्चा नहीं होती. लेकिन कोविड के आसपास इसका नाम एक स्कैंडल को लेकर उछला था. दरअसल यहां शासन कर रहे डेनमार्क ने साठ के दशक में सैकड़ों लड़कियों को खुफिया तौर पर एक प्रयोग का हिस्सा बना लिया था. इसे कॉइल स्कैंडल कहा गया.
कैसा है ग्रीनलैंड और यहां कौन रहता है
ग्रीनलैंड उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच बसा द्वीप है. यह भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका महाद्वीप का हिस्सा माना जाता है, लेकिन राजनीतिक तौर पर देखें तो यह डेनमार्क के अधीन स्वायत्त क्षेत्र है. क्षेत्रफल के लिहाज से यह दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है. इसका कुल क्षेत्रफल 21 लाख 66 हजार वर्ग किलोमीटर है.
भौगोलिक विस्तार के मामले में दुनिया के 12वें सबसे बड़े देश की आबादी साठ हजार के आसपास है. इन्हें इनुइट कहते हैं. डेनिश बोलने वाले ये लोग आय के लिए पूरी तरह से पर्यटकों पर निर्भर हैं. वे स्थानीय केक, मछलियां और रेंडियर की सींग से बने सामान बेचते हैं. बेहद ठंडे मौसम में ये कच्चा मांस खाते हुए घरों के भीतर ही बंद रहते हैं. तब कारोबार भी बंद रहता है.
मिशनरियों के पहुंचने से बदली व्यवस्था
ग्रीनलैंड में रहने वाले इनुइट लोग यानी यहां की मूल आबादी पहले छोटे-छोटे समुदायों में रहती थी. 18वीं सदी में डेनमार्क के मिशनरी और व्यापारी वहां पहुंचे और धीरे-धीरे डेनमार्क का असर वहां दिखने लगा. बाद में इसे औपचारिक रूप से डेनमार्क के अधीन मान लिया गया. दूसरे वर्ल्ड वॉर के बाद ग्रीनलैंड की अहमियत बढ़ने लगी क्योंकि यह अमेरिका और यूरोप के बीच रणनीतिक जगह पर है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान इस कदर खौफ में था कि उसे किसी तरह भी इस जंग को रुकवाना था. इसके लिए पाकिस्तान राष्ट्रपति ट्रंप के एक पूर्व बॉडीगार्ड तक के पास चला गया था. ट्रंप का ये बॉडीगार्ड कीथ शिलर अमेरिका में लॉबिंग फर्म चलाता है. इसके अलावा पाकिस्तान ने अमेरिका के कई दूसरे लॉबिंग फर्मों की सेवा ली और 45 करोड़ खर्च किए.

उत्तरी ध्रुव के नजदीक मौजूद ग्रीनलैंड की पहचान दुनिया के सबसे बड़े द्वीप के रूप में रही है. डेनमार्क के अधीन इस द्वीप पर सिर्फ 56 हजार लोग रहते हैं, उसमें से भी 18 हजार राजधानी न्यूक में. लेकिन, बर्फ से ढंका ग्रीनलैंड अब डोनाल्ड ट्रंप की नजरों में चढ़ गया है. और इस पर कब्जे की आशंका ने NATO को खतरे में डाल दिया है.

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिकी कोर्ट में पेशी के दौरान कहा है कि मैं अब भी वेनेजुएला का राष्ट्रपति हूं और मैंने कोई गलती नहीं की है. हथकड़ी बंधे में मादुरो को भारी सुरक्षा के बीच कोर्ट ले जाया गया. अदालत में सुनवाई के दौरान मादुरो ने जो बातें कही हैं वो संभवतः अमेरिका की चुनौतियों को बढ़ा सकती हैं.

अमेरिका, जो लोकतंत्र, शांति और मानव अधिकारों का हमेशा से समर्थन करता रहा है, उसने संयुक्त राष्ट्र जैसी महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्था को मजाक का पात्र बना दिया है. संयुक्त राष्ट्र के यूएन चार्टर के अनुसार, सभी देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना जरूरी है और किसी भी देश को दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. लेकिन अमेरिका ने इस संवैधानिक नियम की अनदेखी करते हुए संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों की जमकर अवहेलना की है. इससे वैश्विक सद्भाव और विश्व राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ा है. ऐसे कारनामे लोकतंत्र और अंतर्राष्ट्रीय कानून की मूल अवधारणाओं के खिलाफ हैं और समुचित सम्मान और नियमों का पालन आवश्यक है.

पांच जनवरी को वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लोर मैनहैटन की अदालत में पेश किया गया. उस समय उनके हाथों को हथकड़ी से बांधा गया था और अमेरिकी सेना के जवान उन्हें एक बख्तरबंद गाड़ी की तरफ ले जा रहे थे. मादुरो 2013 से वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति हैं और उन्हें कभी नहीं लगा होगा कि किसी दूसरे देश में उन्हें अपराधी की तरह पेश किया जाएगा और उनकी यह स्थिति बनेगी.

फेमस जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर (Ian Bremmer) ने खास बातचीत में अमेरिका के वेनेजुएला ऑपरेशन को लेकर चेतावनी जारी की. इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में ब्रेमर ने कहा कि 3 जनवरी को कराकस में हुआ यह ऑपरेशन उस दौर को दर्शाता है, जिसे वह 'G-Zero वर्ल्ड' यानी वैश्विक नेतृत्व विहीन दुनिया कहते हैं.







