
गुजरात ATS को मिली बड़ी कामयाबी, महाराष्ट्र से 800 करोड़ का MD ड्रग किया जब्त, दो अरेस्ट
AajTak
दोनों आरोपियों से लोकल ड्रग्स पैडलर्स के संपर्क में होने की जानकारी गुजरात एटीएस को प्राप्त हुई है, लेकिन दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह जानकारी एकत्र की जा रही है कि उन्होंने कहां इसकी सप्लाई की है. गैरकानूनी तरीके से मेफेड्रोन (एमडी) बनाने के लिए इन्हें आर्थिक सहायता कौन कर रहा था, इसका भी पता लगाया जा रहा है.
गुजरात ATS ने महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित नदी नाका के एक फ्लैट में रेड करके 10.9 किलोग्राम सेमी लिक्विड मेफेड्रोन (एमडी) और बैरल में भरा 782.2 किलोग्राम लिक्विड मेफेड्रोन (एमडी) जब्त किया है. इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 800 करोड़ रुपए आंकी गई है. इस ड्रग्स को बनाने के लिए रखे गए ग्राइंडर, मोटर, ग्लास फ्लास्क और हीटर भी जब्त किया गया है और दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है.
मुंबई के डोंगरी में रहने वाले मोहम्मद यूनुस और मोहम्मद आदिल को गुजरात एटीएस ने गिरफ्तार किया है. गैरकानूनी तरीके से मेफेड्रोन बनाने के लिए दोनों आरोपियों ने पिछले 9 महीने से महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित एक फ्लैट में मकान रेंट पर लिया था. मेफेड्रोन (एमडी) बनाने के लिए रॉ मटेरियल समेत अन्य सामान को एकत्र करके केमिकल प्रोसेसिंग शुरू किया था.
यह भी पढ़ें: 'उनका टेस्ट होना चाहिए कि किसी ड्रग का कंजम्प्शन करते हैं...', राहुल गांधी के शिव बारात वाले बयान पर बोलीं कंगना
दुबई से करता था स्मगलिंग का काम
गुजरात एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने जानकारी देते हुए कहा कि आरोपी मोहम्मद यूनुस दुबई से गोल्ड और इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स की स्मगलिंग का काम भी करता था. जब वह दुबई गया तब उसकी मुलाकात दुबई में एक शख्स से हुई. इस अजनबी शख्स के साथ मिलकर मोहम्मद यूनुस और मोहम्मद आदिल ने गैरकानूनी तरीके से मेफेड्रोन (एमडी) बनाकर उसे बेचकर आर्थिक फायदा हासिल करने का प्लान बनाया था.
दुबई वाले शख्स की जानकारी नहीं दे रहे आरोपी

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








