
क्यों अहम है 'मिनरल कॉन्फ्रेंस'? जिसमें PAK को न्योता नहीं और अमेरिका पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा और क्वाड सहयोग पर चर्चा की. नई ट्रेड डील से भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की. यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौता अंतिम रूप ले चुका है, जिसके तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ है.
जयशंकर की यह मुलाकात 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान हुई. यहा ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन होना है, जिसमें जी-7 देशों के साथ-साथ खनिज-संपन्न देशों की भागीदारी प्रस्तावित है. इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान को न्योता नहीं मिला है.
इस मंच का उद्देश्य दुर्लभ खनिजों के वैकल्पिक आपूर्ति तंत्र को मजबूत करना है. बैठक में दोनों नेताओं ने क्वाड (Quad) के तहत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई. जयशंकर ने बातचीत को “व्यापक और सार्थक” बताते हुए कहा कि इसमें व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.
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रुबियो और जयशंकर के बीच हुई बातचीत में व्यापार समझौते, क्रिटिकल मिनरल्स और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर विशेष जोर रहा. दोनों नेताओं ने क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, खनन और प्रोसेसिंग में औपचारिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की और डोनाल्ड ट्रंप व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए ट्रेड डील का स्वागत किया.
बैठक में लोकतांत्रिक देशों के बीच आर्थिक अवसर खोलने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और क्वाड के जरिए बहुपक्षीय सहयोग विस्तार पर सहमति बनी, साथ ही एक समृद्ध और स्थिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को साझा रणनीतिक हितों के लिए अहम बताया गया.

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