
क्या स्वाति मालीवाल प्रकरण ने आसान कर दी मुख्यमंत्री के लिए आतिशी की राह?
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आतिशी दिल्ली की नई मुख्यमंत्री होंगी. आम आदमी पार्टी के विधायक दल की बैठक में आतिशी को नया नेता चुना गया. अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्वाति मालिवाल प्रकरण ने मुख्यमंत्री के लिए आतिशी की राह आसान कर दी?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जमानत पर बाहर आने के बाद रविवार को इस्तीफे का ऐलान कर सबको चौंका दिया था. उसके बाद सबकी नजरें इस बात पर टिक गई थीं कि दिल्ली की पॉलिटिक्स में अब वो कौन सा ट्रंप कार्ड चलने वाले हैं? अब उस चेहरे से पर्दा उठ गया है. आम आदमी पार्टी की विधायक दल की बैठक में आतिशी को नया नेता चुन लिया गया है.
आतिशी दिल्ली की अगली मुख्यमंत्री होंगी, अब ये तय हो गया है. ऐसे में बात इसे लेकर भी हो रही है कि क्या स्वाति मालीवाल प्रकरण ने मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए आतिशी की राह आसान कर दी? दरअसल, दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की गिनती आम आदमी पार्टी के सबसे मुखर नेताओं में होती थी.
आम आदमी पार्टी की महिला नेताओं की कतार में स्वाति का नाम सबसे आगे हुआ करता था लेकिन सीएम हाउस में अपने साथ हुई मारपीट के प्रकरण के बाद स्वाति पार्टी के लिए मुश्किल का सबब बन गई हैं. स्वाति संसद के भीतर और बाहर आम आदमी पार्टी को घेर रही हैं. उनके प्रकरण को लेकर विपक्षी पार्टियां भी सीएम केजरीवाल पर हमलावर हैं, खासकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी). बीजेपी स्वाति मालीवाल प्रकरण के बहाने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर केजरीवाल को घेर रही है. अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाले पर जनता की अदालत में जाने की बात कही है. सीएम पद से इस्तीफा देकर सीएम आवास खाली करके वे ‘शीश महल’ के आरोपों की भी धार कुंद कर देंगे लेकिन महिला सुरक्षा के मुद्दे पर जवाब दे पाना उनके लिए इतना आसान नहीं होता क्योंकि स्वाति मालीवाल प्रकरण के मुख्य आरोपी विभव कुमार खुद सीएम अरविंद केजरीवाल के पीए थे. विधानसभा चुनाव में भी स्वाति मालीवाल आम आदमी पार्टी के खिलाफ सड़कों पर उतरी दिखें तो हैरानी नहीं होगी. ऐसे में उन्हें जवाब देने के लिए केजरीवाल के पास आतिशी जैसा मुखर चेहरा जरूरी था.
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आतिशी ये काम किसी भी दूसरे नेता फिर चाहे वो सौरभ भारद्वाज हों या कैलाश गहलोत. इन सबकी तुलना में ज्यादा बेहतर तरीके से कर पाएंगी. पिछले 10 साल से बीजेपी का देशभर में डंका बजा हुआ है. वो एक के बाद एक राज्यों मे सरकार बनाती जा रही है लेकिन दिल्ली उनके लिए अभेद्य किला बनी हुई है. लोकसभा चुनाव में क्लीन स्वीप करने के बाद बीजेपी को इस बार अपने लिए अच्छी उम्मीदें हैं. पार्टी की नई नवेली सांसद बांसुरी स्वराज सरकार के खिलाफ मुखर हैं. अमेठी से लोकसभा चुनाव हारने के बाद बीजेपी के सदस्यता अभियान के दौरान स्मृति ईरानी भी दिल्ली में खासी सक्रिय नजर आईं.
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