
क्या यूरोप में बढ़ रहा हिंदूफोबिया, स्कॉटलैंड में बेहद छोटी आबादी के साथ भी भेदभाव, संसद में उठा मामला
AajTak
कुछ समय से पश्चिम, खासकर कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में हिंदुओं के खिलाफ नफरती तौर-तरीके बढ़े, वहीं स्कॉटलैंड की संसद में हिंदूफोबिया पर लगाम लगाने की बात हो रही है. स्कॉटिश संसद की सदस्य एश रेगन ने मुद्दा उठाते हुए इसके खिलाफ प्रस्ताव लाने की बात की. लगभग तीस हजार हिंदू आबादी वाले इस देश में ऐसा क्या हो रहा है, जो बात पार्लियामेंट तक पहुंच गई?
स्कॉटलैंड की संसद में हाल ही में हिंदूफोबिया का मुद्दा उठा. स्कॉटिश सांसद एश रेगन ने मामले पर बात करते हुए कहा कि अगर मंदिरों में तोड़फोड़ हो, या लोगों से भेदभाव हो, तो इसका मतलब ये नहीं कि हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं, बल्कि ये देश के मूल्यों के साथ भी खिलवाड़ है. कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में हाल में हिंदू आबाद के लिए बढ़ती अस्वीकार्यता के बीच ये नया कदम है. इससे पहले एंटी सेमिटिज्म यानी यहूदियों से नफरत और इस्लामोफोबिया जैसे टर्म्स पर चर्चा होती रही.
स्कॉटलैंड की कुलआबादी में लगभग 0.3 प्रतिशत हिंदू हैं. इतनी छोटी जनसंख्या भी स्थानीय लोगों की कथित नफरत से बची हुई नहीं. हाल में संसद में उठा मुद्दा एक खास रिपोर्ट- हिंदूफोबिया इन स्कॉटलैंड पर आधारित है, जो गांधियन पीस सोसायटी ने तैयार की थी. इसी साल जनवरी के आखिर में इसे रिलीज किया गया. ये पहली बार है कि जब इस देश में हिंदुओं के खिलाफ भेदभाव पर खुलकर बात हुई. इसी रिपोर्ट को लेते हुए संसद सदस्य हिंदुओं की सुरक्षा के लिए नियम बनाने की बात कर रहे हैं. साथ ही हिंदूफोबिया की औपचारिक रूप से निंदा की गई, जो पूरे यूरोपियन यूनियन में पहली बार हुआ.
क्या कहती है रिपोर्ट - इसके मुताबिक, साल 2019 से अगले तीन साल में हिंदुओं से जुड़े हेट क्राइम्स 9 से बढ़कर 14 हो गए. ये 56% की बढ़त है. - साल 2020 और इसके अगले वर्ष भी मंदिरों में तोड़फोड़ और आगजनी जैसे घटनाएं हुईं. - स्टडी में पाया गया कि 90 फीसदी से ज्यादा हिंदू कर्मचारी धार्मिक कपड़े पहनने या पहचान जाहिर करने से बचते हैं. - लगभग 38% की धार्मिक छुट्टियों की मांगों को प्राइवेट और सरकारी दफ्तरों में रिजेक्ट कर दिया गया. - स्टडी में एक सर्वे का जिक्र था, जिसके अनुसार 16 फीसदी स्कॉटिश लोगों ने माना कि वे अपने करीबी के किसी हिंदू से शादी को पसंद नहीं करेंगे. साल 2010 में ये प्रतिशत काफी कम था. तुलना करें ये तो ये नापसंदगी यहूदियों और मुस्लिमों से काफी ज्यादा है.
कितनी है वहां हिंदू आबादी वहां 54 लाख आबादी में 0.3 प्रतिशत हिंदू हैं. माइनोरिटी में ये काफी कम प्रतिशत है. इससे कहीं ज्यादा दूसरे धर्म जैसे यहूदी और मुस्लिम रहते हैं. स्कॉटलैंड में बसा ये समुदाय कई अलग तरह के प्रोफेशन में है लेकिन राजनीति में उतना स्पेस नहीं पा सका.
क्या है हिंदूफोबिया फोबिया यानी किसी खास चीज या सोच के लिए अतिरिक्त डर. धर्म की बात करें तो किसी धर्म विशेष से बेवजह का खतरा महसूस करना भी फोबिया बन जाता है. बीते कुछ समय से विदेश में रहकर पढ़ते या काम करते हिंदुओं पर हिंसा की खबरें आ रही हैं. उनके कपड़ों या धार्मिक सोच पर कमेंट हो रही है. यहां तक कि उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कहा जा रहा है. इस नफरत को नाम दिया गया, हिंदूफोबिया.
इससे पहले भी कई धर्मों के साथ ऐसा हुआ - सबसे पहले यहूदियों से नफरत दिखाई दी. इसे एंटी-सेमिटिज्म नाम मिला. - इस्लामोफोबिया शब्द 9/11 के बाद चलन में आया. यह मुस्लिम समुदाय के लिए डर, नफरत और भेदभाव को दिखाता है. - क्रिश्चियन्स को भी धर्म की वजह से भेदभाव झेलना पड़ा, जैसे मुस्लिम बहुल अफ्रीकी देशों में. या फिर खुद हमारे देश में ऐसी कुछ घटनाएं हुईं. - हिंदूफोबिया नया टर्म है, जो अमेरिका या ब्रिटेन में भेदभाव पर हुए अध्ययनों के बाद से सुनाई देने लगा.

ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की मौत से ईरान बुरी तरह आहत है. इस हमले में लारिजानी का बेटा भी मारा गया है. ईरान ने अब अमेरिकी और इजरायली हमले के जवाब में कार्रवाई तेज करते हुए कई क्लस्टर बम गिराए है और तेल अवीव में भारी नुकसान पहुंचाया है और अनुमान लगाया जा रहा है कि जंग यहां से अब और भीषण रूप ले लेगी.

ईरान और अमेरिका-इजरायल की जंग का आज 19वां दिन है. लेकिन ये जंग अब थमने का नाम नहीं ले रही है. दोनों तरफ से ताबड़तोड़ हमले जारी है. इस बीच ईरान ने दुबई पर फिर हमला किया है. इस हमले का वीडियो भी सामने आया है. हमले के बाद दुबई के कई इलाकों में धमाकों की आवाज सुनाई दी. दुबई के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर तबाह किया.

ईरान और अमेरिका की जंग का आज 19वीं दिन है. इस बीच इजरायल के हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ लीडर अली लारिजानी की मौत के बाद अब ईरान ने इजरायल और अमेरिकी बेसों पर हमले तेज कर दिए हैं. ईरान ने मिसाइल हमलों का वीडियो भी जारी किया है. IRGC ने कहा कि हमले में मल्टी-वॉरहेड बैलिस्टिक मिसाइलों समेत कई और घातक मिसाइलें शामिल हैं.

अमेरिका ने होर्मुज के समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से हमला किया है. अमेरिकी राष्पति ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि उनके साथी देश (नाटो) इस लड़ाई में साथ नहीं दे रहे हैं. इस हमले का मकसद तेल की सप्लाई को बहाल करना और ईरानी मिसाइलों के खतरे को खत्म करना है.

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां आक्रामक रुख अपनाया है, वहीं कई सहयोगी देश सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाकर कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं. ब्रिटेन के ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिसे लेकर ट्रंप भड़क गए हैं.

इज़रायल ने दावा किया है कि ईरान की नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी का भी खात्मा कर दिया है. अली लारीजानी को ईरान का De Facto Leader भी कहा जाता था, जो असल में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद पूरे देश की सत्ता संभाल रहे थे. शुक्रवार को उन्हें आखिरी बार तेहरान के उस जुलूस में देखा गया था, जो फिलिस्तीन की आज़ादी के लिए निकाला जा रहा था. उस जुलूस में अली लारीजानी ने तेहरान की सड़कों पर उतरकर अमेरिका और इज़रायल को खुली चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि ईरान के नेता छिपकर डरने वालों में से नहीं है और उसी दिन उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के लिए भी ये कहा था कि इस युद्ध में वो खुद को बचाकर रखें. उस वक्त ऐसा माना गया कि अली लारीजानी खुल्लम-खुल्ला राष्ट्रपति ट्रंप को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और दावा है कि इसी के बाद इज़रायल'और अमेरिका दोनों ने मिलकर उनका डेथ वॉरंट लिख दिया.







