
कैथोलिक देश, ईसाई मान्यता और मुट्ठी भर हिंदू... फिर भी वेनेजुएला का क्या है ‘ॐ’ से जुड़ाव?
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वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस का सनातन परंपरा से गहरा संबंध है. दोनों सत्य साईं बाबा के अनुयायी हैं और 2005 में आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी स्थित प्रशांति निलयम आश्रम भी गए थे. निकोलस मादुरो सनातनी प्रतीक चिह्न ‘ॐ’ के महत्व को भी मानते हैं.
वेनेजुएला के राष्ट्रपति रहे निकोलस मादुरो पत्नी समेत अमेरिका के कब्जे में हैं. सामने आया था कि अमेरिकी सेना ने उन्हें पत्नी समेत बेडरूम से निकाला और हथकड़ियां पहनाकर यूएस ले गए थे. अमेरिका मादुरो पर ड्रग तस्करी गिरोह चलाने और बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन कराने के आरोप लगाता रहा है.
निकोलस मादुरो की गैरमौजूदगी में वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति रहीं डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया है. इन तमाम चर्चाओं के बीच सामने आया है कि निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस का सनातन परंपरा से भी जुड़ाव रहा है. बतौर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो सनातनी प्रतीक चिह्नों को तवज्जो देते रहे हैं.
सनातनी चिह्नों के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर
वेनेजुएला की साल 2024 की एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है. यह वेनेजुएला की ओर से भेजे गए निमंत्रण पत्र की तस्वीर है. इस इन्विटेशन लेटर के दोनों सिरों पर 'ओम' बना हुआ है. ओम सनातन परंपरा का प्रतीक चिह्न है जो ब्रह्नांड की ध्वनि, उसकी उत्पत्ति और विकास और विनाश की निरंतरता का प्रतीक है. ओम वह वैदिक शब्द है जो हर मंत्र के पहले अनिवार्य रूप से शामिल है और अपने आप में एक पूर्ण मंत्र है.
वेनेजुएला के इन्विटेशन लेटर पर 'ओम' का होना यह बताता है कि राष्ट्रपति रहे निकोलस मादुरो सनातन के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखते आए हैं. जबकि वेनेजुएला एक कैथोलिक देश है. यहां की बड़ी आबादी ईसाई पंथ और परंपरा को मानती है. खुद मादुरो और उनकी पत्नी भी कैथोलिक हैं. इस देश में हिंदू आबादी 2000 से भी कम है. असल में सामने आया है कि मादुरो और उनकी पत्नी का सनातन से ये जुड़ाव भारत से आया है.
सत्य साईं बाबा के अनुयायी रहे हैं निकोलस मादुरो

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