
इस देश ने 5 गुना बढ़ाई फ्यूल की कीमतें, बिजली 25% हुई महंगी, जानें क्या है वजह
AajTak
क्यूबा इस वक्त इंफ्लेशन यानी मुद्रास्फिति के कठिन दौर से गुजर रहा है. इस बीच यहां की सरकार ने फ्यूल की कीमतों में 5 गुना इजाफा हो गया है. यह फैसला 1 फरवरी से पूरे क्यूबा में लागू हो जाएगा. फिलहाल, सरकार द्वारा ईंधन की कीमतों में वृद्धि के बाद क्यूबा में फ्यूल पंपों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं.
क्यूबा देश इन दिनों भीषण मंहगाई के दौर से गुजर रहा है. क्यूबाई सरकार ने अपने देशवासियों को बड़ा झटका देते हुए फ्यूल की कीमतों में इजाफा करने का फैसला किया है.
फ्यूल की कीमतों में 5 गुना इजाफा
क्यूबा इंफ्लेशन यानी मुद्रास्फीति के कठिन दौर से गुजर रहा है. यहां फ्यूल की कीमतों में 5 गुना इजाफा हो गया है. यह फैसला 1 फरवरी से पूरे क्यूबा में लागू हो जाएगा. यहां अब तक एक लीटर नियमित गैसोलीन की कीमत 25 Peso ( 86.58 रुपये) थी. इस फैसले के बाद इसकी कीमत बढ़कर 132 Peso(457.15 रुपये) हो जाएगी. वहीं, प्रीमियम गैसोलीन की कीमत 30 Peso (103.9) प्रति लीटर थी. अब 156 Peso ( 540.26 रुपये) में बिकेगी. क्यूबाई सरकार ने डीजल समेत अन्य ईंधनों पर पर भी 5 गुना इजाफा किया है. साथ बिजली की कीमतों में 25% की वृद्धि की गई है. इसके अलावा प्राकृतिक गैस की लागत में भी इजाफा होगा.
कोरोना वायरस और अमेरिका प्रतिबंध क्यूबा के इस हालात के जिम्मेदार
क्यूबा के वित्त मंत्री व्लादिमीर रेगुएरो ने कहा है कि सरकार 29 नए पेट्रोल स्टेशन भी खोलेगी जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ईंधन खरीद पर सिर्फ अमेरिकी डॉलर में भुगतान स्वीकार करेंगे. उनका मानना है कि इन उपायों से देश के मौजूदा घाटे में कमी आएगी और क्यूबा नगदी संकट से उबरेगा.बता दें कि क्यूबा आर्थिक उथल -पुथल का शिकार हुआ है. कोरोना वायरस महामारी और अमेरिका द्वारा कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति और खराब हो गई.
रियायती कीमतों पर फ्यूल नहीं बेचने का दे दिया था संकेत

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.







