
इजरायल दौरे पर पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर, बॉन्डी बीच आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सिडनी के बॉन्डी बीच पर हनुक्का समारोह के दौरान हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारत और इजरायल आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हैं.
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच पर यहूदियों के हनुक्का उत्सव के दौरान हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की. इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर यरूशलम पहुंचे जयशंकर ने अपने इजरायली समकक्ष गिदेओन मोशे सआर के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और इजरायल, दोनों ही देश आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हैं.
जयशंकर ने सिडनी आतंकी हमले में जान गंवाने वालों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, 'बॉन्डी बीच पर हनुक्का उत्सव के दौरान हुए आतंकी हमले में लोगों की मौत से हम बेहद दुखी हैं. हम इस कायराना हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं.' उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में इजरायल के निरंतर समर्थन के लिए भी धन्यवाद दिया. यह हमला 14 दिसंबर को ‘हनुक्का बाय द सी’ इवेंट के दौरान हुआ था, जिसमें दो बंदूकधारियों ने भीड़ को निशाना बनाकर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. इस आतंकी हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से अधिक घायल हुए हैं.
जयशंकर ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी पिछले एक दशक में काफी मजबूत हुई है. उन्होंने कहा, 'हम एक-दूसरे के पूरक साझेदार हैं और इस सहयोग की पूरी क्षमता का उपयोग किया जाना चाहिए.' उन्होंने गाजा पीस प्लान के लिए भारत के समर्थन को भी दोहराया और उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में स्थायी और टिकाऊ समाधान निकल सकेगा. विदेश मंत्री जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रस्तावित भारत दौरे की तैयारियां चल रही हैं.
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जल्द भारत दौरे पर आएंगे नेतन्याहू
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जिसके बाद नेतन्याहू ने कहा था कि दोनों नेता जल्द ही मुलाकात करेंगे. जयशंकर अपनी दो दिवसीय इस यात्रा के दौरान इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी मुलाकात करेंगे. इन नेताओं के बीच द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी भारत–इजरायल रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर जोर रहेगा.

ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की मौत से ईरान बुरी तरह आहत है. इस हमले में लारिजानी का बेटा भी मारा गया है. ईरान ने अब अमेरिकी और इजरायली हमले के जवाब में कार्रवाई तेज करते हुए कई क्लस्टर बम गिराए है और तेल अवीव में भारी नुकसान पहुंचाया है और अनुमान लगाया जा रहा है कि जंग यहां से अब और भीषण रूप ले लेगी.

ईरान और अमेरिका-इजरायल की जंग का आज 19वां दिन है. लेकिन ये जंग अब थमने का नाम नहीं ले रही है. दोनों तरफ से ताबड़तोड़ हमले जारी है. इस बीच ईरान ने दुबई पर फिर हमला किया है. इस हमले का वीडियो भी सामने आया है. हमले के बाद दुबई के कई इलाकों में धमाकों की आवाज सुनाई दी. दुबई के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर तबाह किया.

ईरान और अमेरिका की जंग का आज 19वीं दिन है. इस बीच इजरायल के हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ लीडर अली लारिजानी की मौत के बाद अब ईरान ने इजरायल और अमेरिकी बेसों पर हमले तेज कर दिए हैं. ईरान ने मिसाइल हमलों का वीडियो भी जारी किया है. IRGC ने कहा कि हमले में मल्टी-वॉरहेड बैलिस्टिक मिसाइलों समेत कई और घातक मिसाइलें शामिल हैं.

अमेरिका ने होर्मुज के समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से हमला किया है. अमेरिकी राष्पति ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि उनके साथी देश (नाटो) इस लड़ाई में साथ नहीं दे रहे हैं. इस हमले का मकसद तेल की सप्लाई को बहाल करना और ईरानी मिसाइलों के खतरे को खत्म करना है.

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां आक्रामक रुख अपनाया है, वहीं कई सहयोगी देश सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाकर कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं. ब्रिटेन के ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिसे लेकर ट्रंप भड़क गए हैं.

इज़रायल ने दावा किया है कि ईरान की नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी का भी खात्मा कर दिया है. अली लारीजानी को ईरान का De Facto Leader भी कहा जाता था, जो असल में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद पूरे देश की सत्ता संभाल रहे थे. शुक्रवार को उन्हें आखिरी बार तेहरान के उस जुलूस में देखा गया था, जो फिलिस्तीन की आज़ादी के लिए निकाला जा रहा था. उस जुलूस में अली लारीजानी ने तेहरान की सड़कों पर उतरकर अमेरिका और इज़रायल को खुली चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि ईरान के नेता छिपकर डरने वालों में से नहीं है और उसी दिन उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के लिए भी ये कहा था कि इस युद्ध में वो खुद को बचाकर रखें. उस वक्त ऐसा माना गया कि अली लारीजानी खुल्लम-खुल्ला राष्ट्रपति ट्रंप को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और दावा है कि इसी के बाद इज़रायल'और अमेरिका दोनों ने मिलकर उनका डेथ वॉरंट लिख दिया.







