
Gold Rate: टैरिफ टेंशन और फेस्टिव डिमांड... नहीं रुक रहा सोना, अब इतने रुपये हुआ भाव
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टैरिफ टेंशन और त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही सोने की जबरदस्त डिमांड देखी जा रही है, जिस कारण सोने और चांदी के भाव में तेजी आई है. एमसीएक्स से लेकर बुलियन मार्केट तक सोने के दाम काफी बढ़ चुके हैं.
ग्लोबल मार्केट में सोना लगातार तेजी दिखा रहा है. सोना तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर और चांद पांच सप्ताह के हाई पर पहुंच चुका है. भारत में चांदी की कीमतों में भी गजब की तेजी देखी गई है और यह पहली बार है कि एमसीएक्स पर चांदी 1 लाख 17000 रुपये प्रति किलोग्राम को पार पहुंच चुकी है.
गुड रिटर्न्स के अनुसार, शनिवार के शुरुआती कारोबार में 24 कैरेट सोने की कीमत 10 रुपये बढ़कर 1,04,950 रुपये प्रति दस ग्राम हो गई. इसी तरह, 22 कैरेट सोना 10 रुपये बढ़कर 96,200 रुपये प्रति दस ग्राम हो गया. चांदी भी 100 रुपये बढ़कर 1,21,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया.
32 फीसदी बढ़ा सोने का भाव इस साल, भारत में सोने की कीमतों में लगभग 32% की वृद्धि हुई है. जनवरी में 80,000 रुपये प्रति दस ग्राम से शुरू होकर, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर हाजिर सोना मार्च में 90,000 रुपये और हाल ही में एक लाख रुपये के आंकड़े को पार कर गया.
क्यों इतना महंगा हुआ सोना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, सोना मई की शुरुआत में 3,392 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया और जून के मध्य में 3,368 डॉलर के आसपास रहा. विश्लेषक इस तेजी की वजह भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर अमेरिकी डॉलर और रुपये में अस्थिरता को बता रहे हैं.
टैरिफ टेंशन के बीच बढ़ी सोने की मांग इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की उपाध्यक्ष और एस्पेक्ट ग्लोबल वेंचर्स की कार्यकारी अध्यक्ष अक्षा कंबोज ने कहा कि सूत्रों ने संकेत दिया है कि आगामी त्योहारी सीजन के लिए ज्वैलर्स की जबरदस्त मांग ने भारतीय सोने के बाजार को गति दी है. एमसीएक्स पर घरेलू वायदा भाव 3 सप्ताह के हाई स्तर 1,03,350 रुपये पर पहुंच चुका है. उन्होंने आगे कहा कि भारतीय निर्यात पर 50% के अमेरिकी टैरिफ ने भी सोने जैसी सुरक्षित निवेश संपत्तियों की मांग बढ़ा दी है.
मेहता इक्विटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी) राहुल कलंत्री ने कहा कि सुरक्षित निवेश के लिए खरीदारी और डॉलर इंडेक्स में मुनाफावसूली के बीच सर्राफा कीमतों में तेजी जारी रही. घरेलू स्तर पर चांदी ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई, जो मजबूत स्थानीय मांग का संकेत है.













