
भारत में 'हमास-हमदर्दों' का चेहरा बनाने के लिए इजरायल ने प्रियंका गांधी को क्यों चुना?
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भारत की विदेश नीति इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ संतुलन बनाए रखने की रही है. भारत एक तरफ हमास को आतंकी समूह नहीं मानता है और गाजा में मानवीय संकट पर चिंता भी जताता है तो दूसरी तरफ इजरायल की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का समर्थन भी करता है. ऐसे में प्रियंका गांधी के बयान पर भारत सरकार ने तो नहीं, अलबत्ता इजरायली राजदूत ने जरूर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
कांग्रेस नेता और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी की पहले तीन बड़े नेताओं में शुमार करती हैं. जाहिर है कि जब वो कुछ बोलती हैं तो उसका राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रभाव होता है. प्रियंका गांधी का गाजा प्रेम किसी से छिपा हुआ नहीं है. वह बहुत पहले से ही इजरायल के हमास विरोधी अभियान का विरोध करती रही हैं. पर अब वह सांसद भी बन चुकी हैं .अब जब वो कुछ भी बोलेंगी उस पर प्रतिक्रियाएं तो होंगी हीं. गांधी ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष, विशेष रूप से गाजा में चल रहे संकट पर मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में इजरायल पर गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि इजरायल ने 60,000 से अधिक लोगों की हत्या की, जिनमें 18,430 बच्चे शामिल हैं. उन्होंने इजरायल के इस कृत्य को नरसंहार बताया.उन्होंने भुखमरी और नागरिकों पर अत्याचार का उल्लेख करते हुए भारत सरकार की चुप्पी को भी शर्मनाक बताया.
हालांकि, उनके बयानों में 7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा अगवा किए गए इजरायलियों का कोई जिक्र नहीं है.साफ दिखता है कि वो एक पक्ष की ही बातें कर रही हैं. यही कारण है कि उनका गाजा प्रेम हमास के लिए सॉफ्ट कॉर्नर रखने जैसा हो जाता है. जाहिर है कि इजरायल को उनकी बात पसंद नहीं आई होगी.
भारत में इज़रायल के राजदूत रेवुएन अजार (Reuven Azar) ने प्रियंका गांधी के आरोपों का कड़ा जवाब दिया. उन्होंने कहा, आपकी गलतबयानी शर्मनाक है. इज़रायल ने 25 हज़ार हमास आतंकवादियों को मारा है. हमास की घिनौनी रणनीतियों का नतीजा है इतने लोगों का मारा जाना. हमास के आतंकी बचने के लिए नागरिकों का सहारा लेते हैं. राहत या निकासी करने वालों पर गोली चलाना और रॉकेट दागना.
रेवुएन अजार ने यह भी कहा कि इज़रायल ने गाज़ा में 20 लाख टन खाद्य सामग्री भेजी, लेकिन हमास ने उन्हें जब्त करने की कोशिश की, जिससे भूख की स्थिति बनी. उन्होंने यह दावा भी किया कि गाज़ा की आबादी पिछले 50 साल में 450 फीसदी बढ़ी है, इसलिए वहां नरसंहार का कोई सवाल नहीं है. हमास के आंकड़ों पर भरोसा न करें.
प्रियंका गांधी का गाजा प्रेम और इसके निहितार्थ
प्रियंका गांधी का गाजा और फिलिस्तीनी नागरिकों के प्रति सहानुभूति कांग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक नीति के अनुरूप है. भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही फिलिस्तीन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है. एक समय ऐसा आया कि फिलिस्तीनी नेता यासर अराफात NAM (नॉन एलाइनमेंट मूवमेंट) तीसरी दुनिया के देशों के साथ एकजुटता के प्रतीक बन गए थे. प्रियंका अपने परिवार की परिपाटी को ही आगे बढ़ा रही हैं. इजरायल को नरसंहार करने वाला कहना उनकी इसी नीति को प्रतिबिंबित करता है. उनके बयानों का उद्देश्य न केवल वैश्विक मंच पर इस मुद्दे को उठाना है, बल्कि भारत के भीतर एक निश्चित मतदाता वर्ग, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय को आकर्षित करना भी है.

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