
दे दो कर्ज... IMF के आगे गिड़गिड़ा रहा है पाकिस्तान, श्रीलंका के बाद इस देश का भी डूबना तय!
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श्रीलंका के दिवालिया होने के पीछे सरकार की नीतियां जिम्मेदार थीं, पाकिस्तान की नीतियां दुनिया में किसी से छिपी नहीं हैं. इन दोनों देशों के राजनेताओं ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे देश की आर्थिक सेहत इतनी बिगड़ गई.
पाकिस्तान की अब उम्मीद केवल आईएमएफ पर टिकी है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्ती के बाद पाकिस्तान के अपने भी मदद देने से कतरा रहे हैं. चीन, UAE समेत कई देश अब पाकिस्तान को IMF की बातें मानने की सलाह दे रहे हैं. इस बीच अब पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. वहीं अगर IMF से फंड मिल भी जाता है तो वो 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित होने वाला है.
पिछले साल श्रीलंका ने खुद को आर्थिक तौर दिवालिया घोषित कर दिया था. अब पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति भी श्रीलंका से बदतर हो चुकी है. श्रीलंका के दिवालिया होने के पीछे सरकार की नीतियां जिम्मेदार थीं, पाकिस्तान की नीतियां दुनिया में किसी से छिपी नहीं हैं. इन दोनों देशों के राजनेताओं ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे देश की आर्थिक सेहत इतनी बिगड़ गई.
दरअसल, मौजूदा समय में पाकिस्तान में महंगाई चरम पर है, लोगों की आमदनी घट रही है. अगर IMF से 1 बिलियन डॉलर की मदद मिल भी जाती है तो उससे कितने दिन तक खतरा टल जाएगा. पाकिस्तान कर्ज की जाल में फंस चुका है, अब उससे बाहर निकलना आसान नहीं है. लोन को चुकाने के लिए लोन लिया जा रहा है. कुछ इसी तरह सालभर पहले श्रीलंका में चल रहा था.
कंगाली की वजह श्रीलंका सरकार की गलत नीतियों की वजह से देश कंगाल हुआ. सरकारी खजाने खाली होने के बावजूद सत्ता में बने रहने के लिए नेताओं ने लोकलुभावन फैसले लिए. ये सबकुछ कर्ज लेकर किया जा रहा था, फिर तो दिवालिया होना तय था. अब पाकिस्तान की बात करते हैं. पाकिस्तान भी कर्ज का आदी चुका है, जिसने अब भयावह रूप ले लिया है. हालांकि इस दौरान पाकिस्तानी सेना के हुक्मरानों और राजनेताओं की संपत्ति बेतहाशा बढ़ी है. राजनीतिक अस्थिरता भी पाकिस्तान को आर्थिक तंगी में धकलने का एक बड़ा कारण है.
असली गुनहगार कौन? श्रीलंका में भ्रष्टाचार चरम पर था, इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, हालात आज सबके सामने है. इतिहास देखें तो पाकिस्तान में राजनेताओं पर सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, आरोप लगते ही नेता पाकिस्तान छोड़कर भाग जाते हैं, या फिर सलाखों के पीछे पहुंच जाते. दोनों जगहों पर जनता ने सरकार के खिलाफ मोर्चो खोल दिया है. श्रीलंका में तो राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों ने कब्जा कर लिया था, तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखीं. ठीक उसी तरह अब पाकिस्तानी आवाम का भी नेताओं के खिलाफ गुस्सा फूटने लगा है, क्योंकि जनता सब जानती है. इन दोनों देशों को कंगाली के लिए यहां के राजनेता जिम्मेदार हैं.
महंगाई से जनता त्रस्त फरवरी 2023 में श्रीलंका में खुदरा महंगाई दर (Sri Lanka Inflation) 50.6 फीसदी रही. जबकि जनवरी में महंगाई दर 51.7 फीसदी थी. यह पिछले साल के मई के बाद सबसे नीचे है. इससे पहले दिसंबर-2022 में 57.2 फीसदी थी. श्रीलंका में गैस सिलेंडर, आटा-चावल से लेकर पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो गई थी. क्योंकि श्रीलंकाई करेंसी धाराशाई हो गई थी.













