
तंबाकू-सिगरेट पर 40%... तो बीड़ी पर GST 18 फीसदी क्यों? समझ लीजिए ये माजरा
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3 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी दरों का ऐलान किया, जो 22 सितंबर से लागू होने वाले हैं. इस ऐलान के तहत तमाम फूड और जरूरत के आइटम सस्ते होने वाले हैं. लेकिन तंबाकू और सिगरेट जैसे उत्पाद महंगे हो रहे हैं.
3 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई ऐलान किए. उन्होंने ज्यादातर फूड आइटम्स और डेली यूज वाली चीजों को 5 फीसदी के GST दायरे में रखा तो वहीं कुछ प्रोडक्ट्स को 18 फीसदी जीएसटी स्लैब में रखने का ऐलान किया.
हालांकि सिगरेट और तंबाकू जैसे हानिकारक प्रोडक्ट्स पर जीएसटी बढ़ाते हुए 40% कर दिया गया, लेकिन बीड़ी पर GST घटाकर 18% स्लैब में डाल दिया गया. बीड़ी बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेंदू पत्ते पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है. अभी सिगरेट-तंबाकू और बीड़ी जैसे उत्पाद पर 28 फीसदी का जीएसटी है. लेकिन इस नए बदलाव के बाद बीड़ी सस्ती हो जाएगी और सिगरेट-तंबाकू महंगे होंगे.
अब इसी को लेकर बिहार में सियासत शुरू हो चुकी है. केरल कांग्रेस ने सरकार को घेरने के प्रयास में एक ऐसा ट्वीट कर दिया, जो उल्टा पड़ गया. केरल कांग्रेस ने बिहार की तुलना बीड़ी से कर दी, जिसे लेकर सियासत गरमाई हुई है.
लोग पूछ रहे क्यों 18% बीड़ी पर जीएसटी? वहीं दूसरी ओर, यह भी सवाल उठ रहे हैं कि जब सिगरेट, तंबाकू जैसे उत्पाद पर 40% GST है तो बाकी बीड़ी पर जीएसटी को घटाकर 18% क्यों किया गया है? इस कदम ने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान कर दिया है, जिन्होंने पूछा है कि क्या सिगरेट हानिकारक है, लेकिन बीड़ी नहीं? कुछ लोगों ने इसे बिहार में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ा है.
क्यों बीड़ी पर घटाया गया GST?
बीड़ी पर जीएसटी में कटौती का उद्देश्य संभवत: घरेलू बीड़ी उद्योग को बचाना हो सकता है, क्योंकि ट्रेड यूनियनों के अनुसार, इसमें 60 से 70 लाख लोग काम करते हैं, जिसमें महिलाओं की भागीदारी ज्यादा है. वहीं श्रम और रोजगार मंत्रालय के एक आंकड़े के अनुसार, देश में लगभग 40 लाख लोग बीड़ी उद्योग से डायरेक्ट जुड़े हुए हैं.













