
कोयंबटूर घर जैसा क्यों लगता है, इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में आए मेहमानों ने बताया
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कोयंबटूर को केवल उद्योगिक शहर नहीं, बल्कि समावेश, उद्यमिता और गर्मजोशी का प्रतीक माना जा रहा है. इंडिया टुडे साउथ कॉन्क्लेव में नेताओं, उद्यमियों और कलाकारों ने इसे
इंडिया टुडे साउथ कॉन्क्लेव में कोयंबटूर को केवल एक टेक्सटाइल हब नहीं, बल्कि एक जीवंत और समावेशी शहर के रूप में प्रस्तुत किया गया. यहां के नेताओं, उद्यमियों, कलाकारों और बदलाव लाने वालों ने बताया कि क्यों यह शहर सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवनशैली और संस्कृति का भी केंद्र है.
विविधता और अपनापन सहजोरी फाउंडेशन की संस्थापक और ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट कल्कि सुब्रमण्यम ने कहा कि कोयंबटूर देश के सबसे समावेशी शहरों में से एक है. सदियों से यहां दूसरे राज्यों से लोग आकर बसे हैं और इसकी प्रगति में योगदान दिया है. यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है.
प्रकृति का आशीर्वाद सिरुथुली की सह-संस्थापक वनीथा मोहन ने कोयंबटूर को “मदर नेचर का खास बच्चा” बताया. उन्होंने कहा कि पश्चिमी घाटों से घिरा यह शहर अपने मीठे पानी, हरियाली और अनोखे मौसम के लिए जाना जाता है. यहां का गर्व प्रकृति ने ही बोया है.
कारोबार और जीवन का संतुलन बीजेपी विधायक वनाती श्रीनिवासन ने इसे व्यापार और जीवन, दोनों के लिए उपयुक्त शहर बताया. उन्होंने कहा, “यह शहर लीडरशिप और मूल्यों को संजोता है. यहां कारोबार करने की आसानी है और जीवन भी आरामदायक है. कोयंबटूर तमिलनाडु का ग्रोथ इंजन है.”
आत्मनिर्भर और भविष्य की ओर कुमारगुरु संस्थान के अध्यक्ष शंकर वनवरायर ने कोयंबटूर को आत्मनिर्भर और प्रगतिशील बताया. उनका कहना था कि यह शहर अतीत पर गर्व करता है लेकिन भविष्य पर भी उतना ही ध्यान देता है. उन्होंने नवाचार और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया.
लोगों की गर्मजोशी आरजे दीपक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां के लोग बेहद मिलनसार हैं. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “कोयंबटूर के लोगों का गुस्सा भी करी डोसा जैसा होता है जल्दी शांत हो जाता है.” वनाती ने भी जोड़ा कि यहां लोग डांटते समय भी कठोर भाषा का प्रयोग नहीं करते.













