
ईरान को भूल गए, आंकड़े दबा गए... रूस से चीन की क्रूड ऑयल खरीद पर फैक्ट छिपा रहे अमेरिकी वित्त मंत्री
AajTak
2025 के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिकी और अन्य पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव के बावजूद भी चीन रूस का सबसे बड़ा कच्चे तेल का खरीदार है. इसके अलावा चीन प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीदता है. जून 2025 में चीन ने ईरान से औसतन 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) कच्चा तेल खरीदा. ये अब तक का सबसे बड़ा आयात था.
रूस से कच्चे तेल की खरीदारी पर अमेरिका ने भारत के खिलाफ फिर से अपना रोना रोया है. अमेरिका ने कहा है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर मुनाफा कमा रहा है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि नई दिल्ली पश्चिमी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है और इसे रिफाइन कर फिर से बेच रहा है मुनाफा कमा रहा है.
वहीं चीन के रूस से कच्चे तेल के आयात पर अमेरिका ने कहा कि उसने अपने कच्चे तेल के आयात का डायवर्सिफिकेशन किया है, यानी कच्चे तेल को अलग अलग देशों से मंगा रहा है.
हालांकि अमेरिका तेल की कहानी की पूरी तस्वीर नहीं बताई. अमेरिका ने यह नहीं बताया कि रूस से चीन के कच्चे तेल का आयात यूक्रेन युद्ध के बाद दोगुना हो गया है. अमेरिका ने यह नहीं बताया कि चीन प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से तेल मंगा रहा है.
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात को अस्वीकार्य बताया. जबकि चीन द्वारा रूसी तेल की खरीदारी को अमेरिकी वित्त मंत्री डिफेंड करते नजर आए. अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि चीन ने अपने कच्चे तेल की खरीदारी के स्रोतों का विस्तार किया है.
यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव के बीच आई है. इसमें नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल है जो 27 अगस्त से लागू होगा.
बिजनेस चैनल सीएनबीसी पर रूसी तेल खरीदने के लिए चीन और भारत के साथ अलग-अलग रवैया अपनाए जाने से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए स्कॉट बेसेंट ने कहा, "रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से चीन का तेल आयात केवल 3 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि रूस से भारत का तेल आयात 40 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ गया है."













