
अब पसंदीदा गाड़ी खरीदना होगा और मुश्किल! हॉर्मुज संकट की तपिश से स्टील से टायर तक सब महंगा
ABP News
ईरान-इज़राइल तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और सप्लाई चेन बाधित होने से भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर पर दबाव बढ़ रहा है. स्टील, एल्यूमीनियम जैसे कच्चे माल महंगे हो रहे हैं. पढ़ें ये रिपोर्ट.
ईरान-इज़राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर पर दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, शिपिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन पर दबाव ने कंपनियों की लागत बढ़ा दी है. युद्ध का सबसे पहला और सबसे बड़ा असर गाड़ी बनाने वाले कच्चे माल पर पड़ा है. स्टील, एल्युमीनियम, रबर, प्लास्टिक, पेंट और केमिकल गाड़ी के हर हिस्से की कीमत बढ़ रही है.
दुनिया का तेल बेंचमार्क बेरंट क्रूड 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. पेट्रोकेमिकल से बनने वाले पेंट और केमिकल की कीमत तो सबसे पहले और सबसे तेज़ बढ़ती है, क्योंकि ये सीधे क्रूड से जुड़े हैं. इसको ऐसे समझे कि अब गाड़ी का हर हिस्सा महंगा बन रहा है और यह महंगाई कंपनियों तक पहुंच रही है.
कंपनियों पर दबाव की कीमत बढ़ाएं या मार्जिन घटाएं?
ब्रोकरेज फर्म Elara Securities ने रिपोर्ट में बताया है कि भारतीय ऑटो सेक्टर दो तरफ से दबाव में है. एक तरफ मिडिल ईस्ट में एक्सपोर्ट बंद होने का सीधा नुकसान है और दूसरी तरफ महंगे कच्चे माल बढ़े हुए माल-भाड़ा दरें और टूटी हुई सप्लाई चेन का दबाव. असर उन कंपनियों पर भी पड़ रहा है, जिनका मिडिल ईस्ट से सीधा कारोबार कम है.
