
संडे व्यू: बांग्लादेश में नया दौर, बाहर नहीं अंदर से है हिन्दू धर्म को खतरा
The Quint
sunday view opinion article: बांग्लादेश चुनाव, भारत-अमेरिका ट्रेड डील से लेकर लेबर कोड तक पढ़ें सुनंदा के दत्ता रे, पी चिदंबरम, निष्ठा गौतम, आर मुकुंदन, जसप्रीत बिंद्रा और देवदत्त पटनायक के विचारों का सार.
सुनंदा के. दत्ता-रे का टेलीग्राफ में लिखा यह लेख बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव में बीएनपी की जीत और उसके परिणामों पर केंद्रित है. खास तौर से इस बात का उल्लेख है कि नए शासक को अपने पिता जियाउर रहमान की तरह भारत से औपचारिक सम्मान के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि नरेंद्र मोदी की पूर्व-बधाई से भारत ने चुनाव प्रक्रिया की अखंडता को मान्यता दी है. यह बीएनपी की ऐतिहासिक भावना को भी स्वीकार करता है, जो 1971 में स्वतंत्रता घोषणा से जुड़ी है. हालांकि, भारत-बांग्लादेश संबंध जटिल हैं—भूमि, जल, व्यापार, विद्रोही, चीन-पाकिस्तान प्रभाव आदि कई स्तरों पर चलते हैं. हिंदुओं की हत्याएं सांप्रदायिक नफरत से कम, स्थानीय विवादों से ज्यादा लगती हैं.
लेख भारत के मुस्लिमों की स्थिति की तुलना करता है, जहां ह्यूमन राइट्स वॉच ने बीजेपी की कट्टरता, मकानों की तोड़फोड़, लिंचिंग आदि की आलोचना की है. संविधान से 'धर्मनिरपेक्षता' हटाकर 'बहुलवाद' लाने की संभावना पर चर्चा है. लेखक की सलाह है कि भारत को कड़ी तटस्थता अपनानी चाहिए, क्योंकि बांग्लादेश अपना सबसे फायदेमंद रास्ता खुद तलाश रहा है. कोई भी बांग्लादेशी यह नहीं मान सकता कि दक्षिण एशिया में सिर्फ भारत मायने रखता है, जैसा शेख हसीना मानती थीं. चुनाव परिणाम को कैसे संभाला जाता है, उस पर बहुत कुछ निर्भर करता है—जनसंख्या विनिमय जैसी चरम संभावनाएँ भी खारिज नहीं की जा सकतीं.
पी. चिदंबरम ने जनसत्ता में लिखा है कि भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित अंतरिम व्यापार समझौता कोई वास्तविक द्विपक्षीय व्यापार समझौता नहीं बल्कि एक खोखला और असमान ढांचे का दस्तावेज है. 6 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान में अमेरिका द्वारा पहले लगाए गए 25% अतिरिक्त शुल्क में कुछ राहत (जैसे 18% तक कम करना) देने की बात है, लेकिन यह भी सशर्त और सीमित है. इसमें भारत से अमेरिकी ऊर्जा, कृषि उत्पादों, विमान, हथियार आदि की भारी खरीद (500 अरब डॉलर तक) करने की अपेक्षा है, जबकि भारत के संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि, दवा और आईटी में अमेरिका से कोई ठोस रियायत नहीं मिलती.
