
'श्रीनगर में बम फटा या सिलेंडर पता ही नहीं चलता था...', बोले कुणाल खेमू, डर के साए में बीता बचपन
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कुणाल ने अपने बचपन के एक इंसीडेंट को शेयर किया और बताया कि जब वो श्रीनगर में रहते थे तो हर दिन कोई न कोई तनाव से जूझते थे. वो बोले कि ये सब जैसे रोज की जिंदगी का हिस्सा था. समझ ही नहीं आता था कि सिलेंडर ब्लास्ट हुआ है या कोई बम फटा है.
बॉलीवुड एक्टर कुणाल खेमू बचपन में मुंबई शिफ्ट होने से पहले श्रीनगर में अपने परिवार के साथ रहे हैं. वो तब 6 साल के थे. कुणाल ने बताया कि वो दौर बहुत टेंशन में बीता करता था. कभी भी बम का फटना, कभी भी पथराव होना, जैसे आपका हर पल सिर्फ इसी को समझने में बीतता हो कि अब क्या होने वाला है. कुणाल ने बताया कि वो डर के साए में जी रहे थे.
कुणाल ने अपने बचपन के एक इंसीडेंट को भी शेयर किया. वो बोले कि ये सब जैसे रोज की जिंदगी का हिस्सा था. समझ ही नहीं आता था कि सिलेंडर ब्लास्ट हुआ है या कोई बम फटा है.
बम फटने की आवाज से डर जाते थे कुणाल
ANI को दिए इंटरव्यू में कुणाल बोले, ''ये 6 साल के बच्चे के नजरिए से है. और मैंने इसे इसी तरह देखा. मुझे याद है... मुझे श्रीनगर की अच्छी बातें याद हैं- मेरा स्कूल, परिवार के साथ डल झील जाना या पहलगाम जाना. और फिर मुझे याद है कि वे तनाव में थे. क्योंकि छह साल के बच्चे के रूप में, आप वास्तव में नहीं जानते कि क्या हो रहा है. और आपके माता-पिता और परिवार आपको जितना हो सके उतना बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन आप अभी भी चीजों के बारे में सुनते हैं, है ना?"
"मुझे याद है कि एक समय ऐसा होता था... कि अगर आप कोई तेज आवाज सुनते थे, तो हमेशा ये भ्रम होता था कि कहीं सिलेंडर फटा है या बम. तो मुझे याद है कि कभी-कभी ये बात बकबक के रूप में होती थी. मुझे याद है कि कई बार ऐसा होता था कि किसी कारण से आप रात में लाइट नहीं जलाते थे क्योंकि घर पर पत्थर मारे जाने का खतरा था. ये घोषित किया जाता था कि शाम को लाइट नहीं जलानी चाहिए."
बचपन में फील किया टेंशन भरा माहौल

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