
बिन बुलाए शादी में घुस गई थी मुन्ना भाई MBBS की टीम, बोमन ईरानी ने सुनाया किस्सा, बताई वजह
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बॉलीवुड एक्टर बोमन ईरानी डायरेक्टर-प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा और फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस फिल्म को लेकर किस्सा सुनाया है. इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया कि कैसे उन्होंने मुन्ना भाई MBBS का हिस्सा बनने का फैसला किया.
मुन्ना भाई M.B.B.S. आज तक की सबसे आइकॉनिक फिल्मों में से एक मानी जाती है. इसमें संजय दत्त और अरशद वारसी लीड रोल में थे, और बोमन ईरानी ने भी फिल्म में डॉ. जेसी अस्थाना का रोल निभाया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब ईरानी को शुरू में यह फिल्म ऑफर की गई थी, तो वह इसके लिए तैयार नहीं थे?
2016 में बोमन ईरानी ने IIMUN में बात करते हुए मुन्ना भाई MBBS के लिए संपर्क किए जाने पर अपनी पहली प्रतिक्रिया याद की. एक्टर ने बताया कि उन्हें 'मुन्ना भाई MBBS' टाइटल पसंद नहीं आया था और उन्हें लगा कि यह बहुत अजीब लगता है.
फिल्म के नाम से ही चिढ़ गए थे बोमन ईरानी साल 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान बोमन ईरानी ने खुलासा करते हुए कहा, 'जब मुझे पहली बार इस फिल्म के लिए संपर्क किया गया, तो एक्सपीरियंस बहुत अच्छा नहीं था. मुझे फिल्म का नाम 'मुन्ना भाई M.B.B.S.' सुनकर ही नफरत हो गई थी. ऐसा लगा कि यह बहुत ही अजीब और बेतुका टाइटल है. जब मुझे बताया गया कि कहानी एक गुंडे की है जो डॉक्टर बनना चाहता है, तो लगा कि यह आईडिया पर्दे पर बुरी तरह फेल होगा. यहां तक कि जब मेरे किरदार (डॉ. अस्थाना) के बारे में बताया गया कि उन्हें बस पूरी फिल्म में हंसना है, तो उन्होंने साफ कह दिया था कि मुझसे यह नहीं होगा.'
विधु विनोद चोपड़ा के जुनून ने बदली सोच बोमन ईरानी के इनकार के बावजूद फिल्म के प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा को अपनी कहानी पर पूरा भरोसा था. बोमन ने याद करते हुए बताया कि जब विधु ने उन्हें स्क्रिप्ट सुनाई, तो उनका पैशन देखने लायक था. कहानी सुनाते वक्त विधु हंस रहे थे और रो भी रहे थे, जिसे देखकर बोमन भी इमोशनल हो गए. उन्होंने कहा कि अगर आपको अपने काम पर विश्वास है, तभी आप दूसरों को मना सकते हैं. विधु के इसी जबरदस्त आत्मविश्वास और इमोशन को देखकर बोमन फिल्म करने के लिए राजी हो गए और इस तरह वो 'डॉ. अस्थाना' बने.
जब शाहरुख और ऐश्वर्या जैसे सितारों ने छोड़ी फिल्म फिल्म की कास्टिंग को लेकर बोमन ने एक बेहद दिलचस्प खुलासा किया. उन्होंने बताया कि संजय दत्त से पहले यह फिल्म शाहरुख खान और विवेक ओबेरॉय जैसे बड़े सितारों को ऑफर हुई थी. शाहरुख खान को उस वक्त रीढ़ की हड्डी (Spine) में समस्या थी, इसलिए उन्हें पीछे हटना पड़ा. यहां तक कि काजोल और ऐश्वर्या राय भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनते-बनते रह गईं. बोमन ने मजाकिया अंदाज में कहा, 'आखिर में सिर्फ मैं ही बचा था क्योंकि मैंने फिल्म के लिए बहुत कम फीस (करीब 2 लाख रुपये) ली थी. और लीड रोल के लिए हमें 44 साल का एक कॉलेज बॉय मिला, जिनका नाम संजय दत्त था.'
बिना बुलाए शादी में घुस गए इस फिल्म से जुड़ा सबसे मजेदार किस्सा इसके क्लाइमेक्स की शूटिंग का है. बोमन ने बताया कि फिल्म का बजट इतना कम था कि आखिरी शॉट (शादी के मंडप वाला सीन) शूट करने के लिए टीम के पास पैसे ही नहीं बचे थे. तब आर्ट डायरेक्टर ने मजाक में सुझाव दिया कि क्यों न किसी असली शादी में बिना बुलाए घुसकर शॉट ले लिया जाए. विधु विनोद चोपड़ा को यह बात पसंद आ गई और फिल्म की टीम ने असल में एक शादी में 'गेट क्रैश' किया और वहां मुन्ना भाई का आखिरी सीन फिल्माया गया. इसी जुगाड़ और मेहनत के साथ वह फिल्म बनी जो आज भी हर भारतीय के दिल के करीब है.













