
'चांटा मार दूंगा...', बोलकर सुनील शेट्टी ने रिजेक्ट की थी 'बॉर्डर', फिर क्यों हुए राजी?
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आइकॉनिक फिल्म बॉर्डर को करने से सुनील शेट्टी ने पहले मना कर दिया था. वो जेपी दत्ता के गुस्से के बारे में सुन चुके थे. क्योंकि सुनील खुद गुस्सेवाले थे तो उन्हें लगा कि कहीं दोनों के बीच मारपीट न हो जाए. लेकिन फिर वक्त बदला और सास के कहने पर सुनील इस फिल्म को करने के लिए राजी हुए. इस बारे में उन्होंने खुद बताया है.
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी के तीन दशक के करियर में जेपी दत्ता की बॉर्डर फिल्म का गहरा प्रभाव है. इस वॉर फिल्म में न सिर्फ उनके किरदार बल्कि खुद सुनील को बहुत प्यार और सराहना मिली, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब एक्टर ने इस फिल्म को करने से मना कर दिया था. हाल ही में उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने फिल्म के लिए इसलिए मना किया था क्योंकि उन्हें जे.पी. दत्ता के गुस्से के बारे में पता चला गया था.
गुस्सेवाले थे सुनील
सुनील ने बताया कि उन्होंने जे.पी. दत्ता के बारे में कुछ कहानियां सुनकर उनके स्वभाव का अंदाजा लगा लिया था. उन्होंने कहा, “मैंने बॉर्डर करने से मना कर दिया था क्योंकि सुना था कि जे.पी. दत्ता बहुत सख्त हैं, और अगर उन्हें गुस्सा आ जाए तो गाली भी दे देते हैं. मैं खुद भी बहुत गुस्से वाला था, तो जब वो मुझसे मिलने आए, मैंने कहा कि मैं बाद में जवाब दूंगा. लेकिन अपने सेक्रेटरी से कह दिया कि मैं ये फिल्म नहीं कर सकता, क्योंकि अगर उन्होंने मुझे गाली दी, तो मैं भी मारपीट कर बैठूंगा, या चांटा मार दूंगा, क्योंकि मैं भी उतना ही गुस्से वाला हूं. मैं किसी से अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहता था.”
सास ने की सिफारिश
रेडियो नशा से बातचीत में सुनील ने आगे बताया, “लेकिन जे.पी. इतने जिद्दी थे कि वो बॉर्डर में मुझे ही भैरव सिंह के रोल में चाहते थे. इसलिए उन्होंने भरत शाह से संपर्क किया, जो मेरी सास को जानते थे. जब फिल्म मेरी सास के जरिए मेरे पास आई और उन्होंने मुझे बैठाकर समझाया, तब मैंने हां कर दी. लेकिन मैंने एक शर्त रखी कि अगर उन्होंने शूटिंग के दौरान गाली दी, तो मैं फिल्म छोड़ दूंगा. लेकिन पहले ही दिन से हमारी इतनी अच्छी बन गई कि जैसे हम बरसों से दोस्त हों. मुझे सच में लगता है कि वो एक ऐसे इंसान हैं जिन्होंने मुझे अपनी फिल्म में तब लिया जब मैं अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा था. उन्होंने कभी मेरी फिल्मों की कमर्शियल वैल्यू नहीं देखी, यही होता है सच्चा दोस्त.”
समझी सच्चे दोस्त की कीमत













