
UPSC परीक्षा में नकल करते पकड़ी गई छात्रा, 3 साल तक नहीं दे पाएगी कोई भी एग्जाम
AajTak
हर साल लाखों छात्र UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में हिस्सा लेते हैं. ऐसे में नकल करने वालों से ईमानदार उम्मीदवारों के हक पर असर पड़ता है. आयोग का कहना है कि वह परीक्षाओं की निष्पक्षता को कमजोर करने वाले किसी भी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेगा.
UPSC की परीक्षा में एक बड़ी कार्रवाई सामने आयी है. एक छात्रा को परीक्षा के दौरान अनधिकृत सामग्री (नकल के साधन) के साथ पकड़ा गया, जिसके बाद आयोग ने उस पर 3 साल का बैन लगा दिया है. इतना ही नहीं, उस छात्र की इस साल की परीक्षा भी रद्द कर दी गई है. UPSC ने अपने बयान में साफ कहा है कि कोई भी अनुचित तरीका अपनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. आयोग ने इस कार्रवाई की जानकारी अपने ऑफिशियल लिंक्डइन पेज पर दी और बताया कि यह कार्रवाई नियम 12(1)(एच) के तहत की गई है.
UPSC चेयरमैन की सख्त चेतावनी आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा, “हम परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए कोई समझौता नहीं करते. अगर कोई भी अभ्यर्थी नकल या अनुचित साधनों का प्रयोग करता है, तो उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी और भविष्य में परीक्षा नहीं दे पाएगा. अभ्यर्थी ने नियम 12(1)(एच) का उल्लंघन किया है, जो परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों के प्रयोग या उनके कब्जे से संबंधित है. इस वर्ष की परीक्षा के लिए उसकी उम्मीदवारी भी रद्द कर दी गई है.
क्यों है मामला अहम? हर साल लाखों छात्र UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में हिस्सा लेते हैं. ऐसे में नकल करने वालों से ईमानदार उम्मीदवारों के हक पर असर पड़ता है. आयोग का कहना है कि वह परीक्षाओं की निष्पक्षता को कमजोर करने वाले किसी भी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेगा.
आयोग ऐसी घटनाओं को गंभीर मानता है क्योंकि इसका असर अन्य योग्य उम्मीदवारों पर पड़ता है. यही वजह है कि आयोग ने इस पर कड़ी कार्रवाई की और सख्त संदेश दिया है. UPSC पहले भी इस तरह की सख्तियां कर चुका है. आयोग बार-बार उम्मीदवारों से अपील करता है कि वे दिशा निर्देश ध्यान से पढ़ें, और परीक्षा के दौरान पूरी ईमानदारी रखें.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












