
SBI का दावा, कोरोना काल में भी लोगों को मिला जमकर रोजगार
Zee News
जून तिमाही में 30.74 करोड़ नियमित नौकरियां सृजित हुईं. इनमें से 16.3 लाख नई नौकरियां थीं, जो पहली बार ईपीएफओ या एनपीए से जुड़े.
मुंबई: देश के सबसे बड़े बैंक SBI (भारतीय स्टेट बैंक) के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वित्त वर्ष 2021-22 में श्रम बाजार की गतिविधियां सुधरेंगी. कंपनियां कोरोना महामारी (Corona Pandemic) कम होने के साथ नियुक्ति की योजनाओं को आगे बढ़ा रही हैं. अर्थशास्त्रियों ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और नई पेंशन योजना (NPS) के नियमित तौर पर जारी मासिक वेतन रजिस्टर के आंकड़ों का जिक्र किया. मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने एक नोट में कहा, 'हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में श्रम बाजार की गतिविधियां बेहतर रहेंगी. कंपनियां आने वाले समय में नियुक्ति योजनाओं को अमल में लाएंगी.' रोजगार को लेकर यह उम्मीद ऐसे समय जताई गई है, जब दूसरी लहर के बाद बेरोजगारों की संख्या बढ़ने और अर्थव्यवस्था में श्रम भागीदारी में कमी को लेकर चिंता जताई जा रही है. 15 लाख लोगों की चली गई थी नौकरी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMII) के अनुसार, केवल अगस्त में 15 लाख भारतीयों की नौकरियां चली गईं. इसमें 13 लाख ग्रामीण क्षेत्रों से हैं. देश में रोजगार आंकड़े की कमी को लेकर विभिन्न तबकों में चिंता जताई जाती रही है. EPFO और NPS के रोजगार के आंकड़े की आलोचना की जाती रही है, क्योंकि यह केवल संगठित क्षेत्र में नौकरियों तक सीमित है, जबकि बहुत सारा काम असंगठित क्षेत्र में होता है.More Related News
