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S-500 की फाइनल हो रही थी डील? इंडियन एयरफोर्स ने पकड़ ली ये 'खामी', S-400 पर ही लगेगा बड़ा दांव; जानें पूरा माजरा
Zee News
Indian Airforce S-500 rejection: भारत अपनी हवाई सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लेने जा रहा है. भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी ने संकेत दिया है कि भारत रूस की नई S-500 प्रोमेथियस मिसाइल सिस्टम खरीदने के बजाय, अपनी S-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम की संख्या बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा.
Indian Airforce S-500 rejection: भारत ने पहले ही रूस से S-400 सिस्टम की कई यूनिट्स प्राप्त कर ली हैं. इस सिस्टम ने अपनी क्षमता साबित की है और यह भारत की हवाई रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गई है. हालांकि, रूस ने भारत को S-500 का भी ऑफर दिया था, जो कि एक अधिक एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम है. लेकिन इंडियन एयरफोर्स के अधिकारी के मुताबिक, S-500 की अत्यधिक लागत और सीमित उत्पादन की वजह से, भारत का झुकाव S-400 की अतिरिक्त यूनिट्स खरीदने की ओर है.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








