
Operation All Out की तर्ज पर अब होगा नक्सलियों का सफाया, टॉप-50 नक्सल कमांडर्स की लिस्ट तैयार
Zee News
सुरक्षा एजेंसियां जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ चलाई जा रही ऑपरेशन ऑल आउट (Operation All Out) की तर्ज पर अब नक्सलियों (Naxalites) का सफाया करने की योजना बनाई जा रही है.
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ जारी ऑपरेशन ऑल आउट (Operation All Out) की तर्ज पर अब नक्सलियों (Naxalites) का सफाया करने की योजना बनाई जा रही है. सुरक्षा एजेंसियों ने टॉप 50 नक्सल कमांडर्स की लिस्ट तैयार की है, जो छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सक्रिय हैं. Zee News को मिली जानकारी के मुताबिक जिन टॉप 50 नक्सल कमांडर्स की लिस्ट तैयार की गई है, उनमें 10 बेहद खतरनाक महिला नक्सल कमांडर्स भी हैं. सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एंटी नक्सल ऑपरेशन (Anti Naxal Operation) चला रही हैं और खुफिया एजेंसियों के आधार पर जो भी इनपुट हमें मिलता है, उसके आधार पर हम करवाई कर रहे हैं. जिन टॉप नक्सल कमांडर्स को मोस्ट वॉन्टेड नक्सलियों की लिस्ट में शामिल किया गया है, उसमें हिडमा भी है.
Ice Breaker missile: भारतीय नौसेना अब अपने बेड़े को और भी ज्यादा खतरनाक बनाने के लिए एक ऐसे मिसाइल सिस्टम पर विचार कर रही है, जो समंदर के बीचों-बीच दुश्मन के होश उड़ा देगा. खबर आ रही है कि भारतीय नौसेना अपने MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों को इजरायल की आधुनिक 'आइस ब्रेकर' मिसाइल से लैस करने की योजना बना रही है. खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना पहले ही इस मिसाइल को अपनी ताकत में शामिल करने की मंजूरी दे चुकी है.

Line Replaceable Units: RVAS ने भारत के स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी अब तेजस Mk-2 के लिए एक महत्वपूर्ण Line Replaceable Unit के विकास में भागीदार बन गई है. तेजस Mk-2 को भारतीय वायुसेना के भविष्य के बेड़े की रीढ़ माना जा रहा है. तेजस Mk-2 एक मीडियम-वेट, सिंगल इंजन, मल्टी-रोल फाइटर जेट होगा. इसमें नया एयरफ्रेम, ज्यादा ताकतवर इंजन, आधुनिक एवियोनिक्स, स्वदेशी AESA रडार और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी.

Pakistani Leader Chief Guest in 1955 republic day: यह किस्सा है साल 1955 का. उस समय भारत ने पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था. उस दौर में भारत अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं को आकार दे रहा था. मलिक गुलाम मोहम्मद का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा था. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी.










