
MP: 'टच वाले मोबाइल नहीं है, बच्चे करें क्या ', कोरोना महामारी में ऑनलाइन टीचिंग ने गरीब बच्चों को किया 'ऑफलाइन'
NDTV India
मध्यप्रदेश: MP को लेकर ASER की रिपोर्ट बताती है कि सरकारी और निजी स्कूलों में 62.7% ऐसे छात्र हैं जिनके घर में स्मार्टफोन या टीवी है. इस सर्वे में पता चला है कि 2018 से 2020 के बीच 6-10 आयु वर्ग में स्कूल न जाने वाले बच्चों का अनुपात 1.8 % से बढ़कर 5.3 % हो गया है. यही नहीं, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में ग्रामीण इलाकों में महज 18.3 % बच्चों ने वीडियो रिकॉर्डिंग का उपयोग किया है, और 8.1 % ने लाइव ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लिया है.
Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)स्कूल शिक्षा विभाग ने 9वीं और 10वीं की कक्षाएं 5 अगस्त से सप्ताह में दो बार खोलने की घोषणा की है. राज्य में 26 जुलाई से 11वीं और 12वीं की क्लास पहले ही प्रारंभ की जा चुकी हैं. हालांकि सीबीएसई और मिशनरी निजी स्कूलों ने कहा है कि सीमित तरीके से स्कूल खोलना आर्थिक रूप से संभव नहीं है, इसलिये वो स्कूल नहीं खोलेंगे. सरकार ने ये भी साफ किया है कि ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहेंगी लेकिन इस सबके बीच ये पता लगा है कि जिन बच्चों को ऑनलाइन साधन सुलभ नहीं है वो लगभग निरक्षरता के दौर में जा रहे हैं. कई अध्ययन बताते हैं वंचित समूहों में ये आंकड़ा और ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में MP के सीएम ने एक कार्यक्रम में बच्चों के साथ पढ़ाई के बारे में बारे में सवाल पूछे थे. सीएम ने एक लड़की आस्था से पूछा था कि कोरोना काल में स्कूल तो खुले फिर फिर आपने पढ़ाई कैसे की? इसके जवाब में आस्था ने कहा था कि ऑनलाइन क्लासेज के थ्रू और सेल्फ स्टडी ऑनलाइन क्लासेज के थ्रू जितना नॉलेज हमको चाहिए, वह मिल जाता था. ऑनलाइन क्लासेज में टीचर हमें अच्छे से एक्सप्लेन करते थे और जो भी 'क्वेरीज' होती थी वह भी बताते थे. मुख्यमंत्री जी के कार्यक्रम में तो ऑनलाइन की खूब तारीफ हुई] लेकिन इस ऑनलाइन दुनिया से एक दुनिया उन बच्चों की है जो ऑफलाइन हो रहे हैं. हालत यहां तक है कि ये बच्चे 'अक्षर' तक भूल रहे हैंMore Related News

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