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Indian Navy को बड़ा झटका! परमाणु पनडुब्बी S-4 लेट, समंदर में उतरने से पहले अटक गई कहानी
Zee News
Indian Navy: इंडियन नेवी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट S-4 पनडुब्बी निर्माण को झटका लगा है. अब यह पनडुब्बी करीब एक साल की देरी से नेवी में कमीशन होगी. इसकी वजह स्वदेशी पार्ट्स हैं. इस सबमरीन 75 से 80 प्रतिशत स्वदेशी पार्ट लगाए जाने की योजना है. इसी वजह से प्रोजेक्ट कुछ तकनीकी समस्याों का सामना कर रहा है.
Indian Navy: भारत का डिफेंस सेक्टर अक्सर लेट लतीफी का शिकार होता रहा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण तेजस है. अब एक बार फिर भारत को झटका लगा है. दरअसल इंडियन नेवी का अति महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को झटका लगा है, जिसके तहत SSBN क्लास की चौथी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल कैपबल पनडुब्बी बन रही है. जिससे S-4 नाम दिया गया है. अब यह तय समय से लेट कमीशन होगी. पहले इसे 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में नौसेना में शामिल करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी एंट्री 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक टल सकती है. यह देरी इसलिए हुई है क्योंकि इस पनडुब्बी में कई नई और स्वदेशी तकनीकों को जोड़ने में ज्यादा समय लग रहा है.

Ajit Pawar plane crash: बारामती एयरपोर्ट पर हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार जिस विमान में सवार थे, वह देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गया. जिस Bombardier Learjet 45XR को आसमान का सबसे सुरक्षित विमान माना जाता था, वही आज मातम का सबब बन गया. इस विमान का इतिहास और इसकी तकनीकी खूबियां अब जांच के दायरे में हैं.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.








