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Holashtak 2026: होलाष्टक में शुभ कार्यों की वर्जना, इसके अलावा भी हैं वो पांच अमंगलकारी मौके जिसमें नहीं होते मंगलकारी आयोजन!
Zee News
Holashtak 2026: होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से शुरू हो जाएंगे. इन 8 दिनों में शुभ काम नहीं होते हैं. होलाष्टक के अलावा सालभर में ऐसे 5 और मौके होते हैं जब मांगलिक कार्य पर रोक लग जाती है.
Holashtak 2026: होलाष्टक 8 दिनों का होता है और इन दिनों में ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है. इन दिनों में ग्रह-नक्षत्र की स्थिति इतनी कमजोर होती है कि जातक की सही निर्णय लेने तक की क्षमता प्रभावित होती है. हालांकि होलाष्टक की अवधि में पूजा पाठ करने से सकारात्मकता का संचार हो सकता है. हालांकि इन दिनों में कोई भी मांगलिक कार्य करने की वर्जना होती है. दिनचर्या को अनुशासित रखने के लिए कहा जाता है क्योंकि इन दिनों में मौसम तेजी से बदल रहा होता है.
शुभ कार्यों का आयोजन वर्जित ध्यान दें कि कि इस साल होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से शुरू हो जाएगा और इन 8 दिनों में किसी भी तरह के शुभ कार्यों का आयोजन नहीं किया जाएगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि होलाष्टक के अलावा भी पूरे साल में ऐसे पांच मौके आते हैं जब किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य को करने पर रोक होती है.
पंचक के पांच दिन पंचक 5 दिन का होता है जिसमें किसी भी तरह का मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है. नया काम, गृह प्रवेश, विवाह का आयोजन आदि नहीं किया जाता है. पंचक 5 तरह के हैं. चोर, रोग, नृप, मृत्यु, अग्नि पंचक.
पितृ पक्ष के 15 दिन होलाष्टक के आठ दिन अशुभ माने जाते हैं लेकिन पितृ पक्ष के पूरे 15 दिन की अवधि में किसी भी तरह के मांगलिक आयोजन नहीं किए जाते हैं. भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से लेकर अश्विन अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष चलता है. इस दौरान पितरों को तृप्ति करने से लेकर उनके पिंडदान आदि के क्रिया कर्म किए जाते हैं. इस साल पितृ पक्ष 26 सितंबर 2026 से लेकर 10 अक्टूबर 2026 तक है.
चातुर्मास के चार महीने चातुर्मास में भी किसी भी तरह के मांगलिक कार्य करने की वर्जना होती है क्योंकि इन चार माह में देवशयनी एकादशी से ही देवता शयन करने लगते हैं और बिना देवता के किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों का आयोजन नहीं किया जाता है. चातुर्मास देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है. 25 जुलाई 2026 से लेकर 20 नवंबर 2026 तक चातुर्मास चलेगा.
